देश के सबसे लंबे राष्ट्रीय राजमार्ग-44 पर हरियाली और सुरक्षा के नाम पर करोड़ों रुपये खर्च होने के बाद भी हालात सुधर नहीं पाए हैं। ग्वालियर-झांसी हाईवे के डिवाइडर और किनारों पर लगाए जाने वाले कनेर, बोगनविलिया, टिकोमा जैसे पौधों की जगह अब जंगली झाड़ियां उग आई हैं। मानकों के अनुरूप ऊंचाई वाले पौधे नहीं होने से रात में सामने से आने वाले वाहनों की हेडलाइट सीधे चालकों की आंखों पर पड़ती है, जिससे हादसों का खतरा बना रहता है।
कन्याकुमारी से श्रीनगर तक जाने वाले एनएच-44 की लंबाई 3745 किलोमीटर है। ग्वालियर-झांसी के बीच करीब 98 किलोमीटर लंबे हिस्से का निर्माण लगभग आठ वर्ष पहले हुआ था। निर्माण के बाद डिवाइडर और हाईवे किनारे हरियाली के लिए कनेर, बोगनविलिया और टिकोमा जैसे पौधे लगाए जाने थे, जिनकी ऊंचाई छह से आठ फीट तक होती है। लेकिन रखरखाव के अभाव में कई स्थानों पर इनकी जगह दो से तीन फीट ऊंची आक और अन्य जंगली झाड़ियां उग आई हैं। इससे न तो हाईवे की सुंदरता बढ़ रही है और न ही वाहन चालकों को सुरक्षा मिल रही है।
सीधी रोशनी से बढ़ रहा हादसों का खतरा
विशेषज्ञों के अनुसार हाईवे के डिवाइडर पर ऊंचाई वाले झाड़ीदार पौधे लगाने का उद्देश्य सामने से आने वाले वाहनों की रोशनी को रोकना होता है। इससे रात में वाहन चलाने वाले चालकों को परेशानी नहीं होती। लेकिन ग्वालियर-झांसी हाईवे पर कई स्थानों पर पौधों की ऊंचाई और प्रजाति मानकों के अनुरूप नहीं है। इसका सीधा असर सड़क सुरक्षा पर पड़ रहा है।
जहरीली गैसों के अवशोषण के लिए लगाए जाते हैं पौधे
जानकारों के मुताबिक हाईवे के डिवाइडर पर पौधे लगाने का उद्देश्य केवल सुंदरीकरण नहीं, बल्कि पर्यावरण संरक्षण भी है। ये पौधे वाहनों से निकलने वाली हानिकारक गैसों को अवशोषित करने में मदद करते हैं। इसके बावजूद दतिया से झांसी के बीच कई स्थानों पर अनुपयोगी पौधे खड़े हैं और उनकी देखरेख नहीं हो रही है। इस मार्ग से रोजाना आठ से दस हजार वाहनों का आवागमन होता है। ऐसे में हाईवे के रखरखाव में लापरवाही सड़क सुरक्षा पर सवाल खड़े कर रही है।
एवेन्यू पर भी हरियाली गायब
एनएचएआई के मानकों के अनुसार हाईवे के दोनों ओर एवेन्यू क्षेत्र में भी निर्धारित दूरी पर पौधे लगाए जाने चाहिए लेकिन कई किलोमीटर तक एवेन्यू क्षेत्र में पौधे नजर नहीं आते हैं। इससे हरियाली बढ़ाने की योजना भी प्रभावित हो रही है।
पांच करोड़ से अधिक हुए थे खर्च
एनएचएआई के एक पूर्व परियोजना निदेशक के अनुसार ग्वालियर-झांसी हाईवे के 98 किलोमीटर हिस्से में पौधरोपण के लिए मध्य प्रदेश वन विकास निगम ने करीब पांच करोड़ रुपये खर्च किए थे। हजारों पौधे लगाने के साथ उनकी सुरक्षा और सिंचाई पर भी धनराशि खर्च की गई थी। बाद में यह काम वन विकास निगम से वापस ले लिया गया।
झांसी-ग्वालियर के बीच एनएच-44 पर कई स्थानों पर आक और अन्य अनुपयोगी पौधे खड़े होने की सूचना मिली है। इन्हें जल्द हटाने और मानकों के अनुरूप पौधे लगाने की कार्रवाई की जाएगी। – भारत सिंह, परियोजना निदेशक, एनएचएआई (ग्वालियर-झांसी)
