झांसी। पश्चिम रेलवे कालोनी और ईस्ट रेलवे कालोनी में परित्यक्त घोषित हो चुके आवासों के ध्वस्तीकरण के आदेश का पालन नहीं हो रहा। इतना ही नहीं विभाग की लचर कार्यप्रणाली के चलते इन जीर्ण-शीर्ण मकानों में बाहरी लोग जमे हुए हैं। जिनसे किराया वसूले जाने का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है। हालांकि रेल प्रशासन ने बृहस्पतिवार को 12 परित्यक्त आवासों का ध्वस्तीकरण कराए जाने का दावा किया है।
रेलवे कालोनी में वर्षों पुराने करीब 294 आवास परित्यक्त घोषित हो चुके है। सभी परित्यक्त आवासों को ध्वस्त करने के रेलवे ने आदेश जारी कर ठेका दे रखा है। लेकिन परित्यक्त आवासों के ध्वस्तीकरण की कार्रवाई की कच्छप गति के चलते कुछ लोगों ने इन आवासों को किराए पर चलाना शुरू कर दिया। सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे वीडियो में परित्यक्त आवासों में रह रहे लोगों ने खुलकर आरोप लगाया कि वह एक व्यक्ति को प्रतिमाह परित्यक्त आवास का किराया दे रहे है। हालांकि संवाद न्यूज एजेंसी ऐसे किसी वायरल वीडियो की पुष्टि नहीं करता है। मामला रेल अफसरों के संज्ञान में आने के बाद बृहस्पतिवार को रेलवे अमला आरपीएफ व प्रेमनगर पुलिस के साथ मौके पर पहुंचा और 12 परित्यक्त आवास जिसमें लोग रह रहे थे, उन्हें खाली कराकर ध्वस्त कराया। इस दौरान रेल अफसरों का आवासों में ठहरे लोगों से वाद-विवाद भी हुआ। लोगों का आरोप है कि सच बोलने के कारण उन्हें चिन्हित कर आवास खाली कराए गए हैं। पीआरओ मनोज कुमार सिंह ने बताया कि परित्यक्त आवासों में रहने वालों पर कार्रवाई की जाएगी। 294 आवास परित्यक्त घोषित हैं और अभी तक 175 आवास ध्वस्त किए जा चुके है। शेष आवास जल्द ध्वस्त किए जाएंगे। उन्होंने कहा कि परित्यक्त आवासों में रेलवे ठेकेदार के मजदूर रह रहे हैं।
