बुंदेलखंड एक्सप्रेसवे पर हुए हादसे में सगे भाइयों सईद कुरैशी और नासिर कुरैशी की मौत ने एक ऐसे परिवार को तोड़ दिया, जिसकी रोजी-रोटी वर्षों से दुधारू पशुओं के कारोबार से जुड़ी थी। परिवार के चारों भाई मिलकर इस कारोबार को संभालते थे और मेहनत के दम पर घर का खर्च चलाते थे।
परिजनों के मुताबिक बड़े भाई सईद कुरैशी (35) और छोटे भाई नासिर कुरैशी (25) आसपास के क्षेत्रों और बाहर से अच्छी नस्ल की दुधारू भैंसें खरीदकर लाते थे। वहीं उनके भाई शकील कुरैशी और आसिफ कुरैशी कोंच व आसपास के इलाकों में इन पशुओं की बिक्री का काम संभालते थे। चारों भाइयों की मेहनत से परिवार की गाड़ी चल रही थी। गुरुवार को भी दोनों भाई इसी काम के सिलसिले में दुधारू भैंस खरीदने के लिए निकले थे, लेकिन रास्ते में हुए हादसे ने पूरे परिवार की खुशियां छीन लीं। सईद की मौत से जहां पत्नी और पांच बच्चों के सिर से पिता का साया उठ गया, वहीं नासिर की मौत से पत्नी और दो बच्चों का सहारा छिन गया। नासिर का सबसे छोटा बच्चा अभी महज करीब सात माह का है।
