हाईकोर्ट की लखनऊ पीठ ने राजधानी के नरही स्थित विद्या मंदिर गर्ल्स हाईस्कूल परिसर से जुड़े किरायेदारी विवाद में जिला विद्यालय निरीक्षक (डीआईओएस) और एडीएम (वित्त एवं राजस्व) के हस्तक्षेप को अवैध ठहराया है।  कोर्ट ने इन अधिकारियों के खिलाफ कड़ा रुख अपनाते हुए कहा कि मकान मालिक और किरायेदार के विवाद में डीआईओएस का दखल वैधानिक नहीं था। एडीएम ने भी सुनवाई का अवसर दिए बिना आदेश पारित कर प्राकृतिक न्याय के सिद्धांतों का उल्लंघन किया।

न्यायमूर्ति जसप्रीत सिंह की एकल पीठ ने 8 जून 2026 के उस आदेश को रद्द कर दिया, जिसके तहत याचियों से परिसर का कब्जा लेकर विद्यालय प्रबंधन को सौंपा गया था। कोर्ट ने डीआईओएस और एडीएम के आचरण को अविधिक मानते हुए दोनों पर 25-25 हजार रुपये का व्यक्तिगत हर्जाना लगाया है। 

यह राशि उन्हें अपने वेतन खाते से एक सप्ताह के भीतर याचियों को अदा करनी होगी। साथ ही विद्यालय प्रबंधन पर भी 25 हजार रुपये का हर्जाना लगाया गया है। हाईकोर्ट ने डॉ. आभा गोयल और डॉ. अमित शेखर की याचिका पर सुनवाई के दौरान स्पष्ट किया कि डीआईओएस यह नहीं बता सके कि निजी किरायेदारी विवाद में हस्तक्षेप करने का अधिकार उन्हें किस कानून के तहत प्राप्त है।

इस मामले में राज्य सरकार ने उत्तर प्रदेश शैक्षणिक संस्थान (संपत्ति के अपव्यय की रोकथाम) अधिनियम, 1974 का हवाला दिया लेकिन न्यायालय ने कहा कि विवादित भवन विद्यालय की संपत्ति नहीं, बल्कि निजी स्वामित्व की संपत्ति है। ऐसे में यह अधिनियम इस मामले पर लागू नहीं होता। 

न्यायालय ने जिला जज, लखनऊ के समक्ष लंबित अपील का एक सप्ताह के भीतर निस्तारण करने का निर्देश दिया है। साथ ही यह भी कहा है कि यदि अपील में विद्यालय प्रबंधन को राहत नहीं मिलती है तो उसे 30 दिन के भीतर परिसर खाली करना होगा। ऐसा न करने पर डीआईओएस छात्राओं को दूसरे विद्यालयों में स्थानांतरित कराने की व्यवस्था करेंगे। कोर्ट ने आदेश देकर याचिका मंजूर कर ली।



Source link

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *