झांसी। जन्म के एक घंटे में स्तनपान (कोलोस्ट्रम) शिशु की रोग-प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने का अहम टीका है। छह माह तक हर डेढ़ घंटे से मां को स्तनपान कराना चाहिए। इससे शिशु की सेहत बेहतर होती है। यदि शिशु को कोई बीमारी है, तो स्तनपान के दौरान संकेत भी मिलते हैं। पहले माह में शिशु का वजन 800 से 900 ग्राम बढ़ता है।
शिशुओं के बेहतर स्वास्थ्य एवं कुपोषण से बचाव के लिए शनिवार से विश्व स्तनपान सप्ताह शुरू होगा। इसकी थीम ‘जीवन की सतत शुरुआत के लिए स्तनपान: कारगर है उसे और मजबूत बनाएं’ है। इसके तहत माताओं को जागरूक किया जाएगा कि सामान्य प्रसव पर एक घंटा तथा ऑपरेशन के चार घंटे में शिशु को स्तनपान कराना बेहद जरूरी होता है। यह भी बताया जाएगा छह माह तक शिशु को केवल स्तनपान कराया जाए।
मेडिकल कॉलेज के बाल रोग विभाग की डॉ. आराधना कनकने ने बताया शिशु के जन्म के बाद मां का दूध (कोलोस्ट्रम) पहला टीका होता है। शुरूआत के तीन दिन मां के कम दूध आता है मगर वह शिशु के लिए पर्याप्त होता है। छह माह तक शिशु को हर डेढ़ घंटे में अंतराल में स्तनपान कराना चाहिए। पहले माह में शिशु का वजन 800-900 ग्राम बढ़ता है। वरिष्ठ बाल रोग विशेषज्ञ डॉ. ओमशंकर चौरसिया ने बताया मां का दूध भोजन नहीं बल्कि शिशु की पहली जैविक सुरक्षा है। मां का दूध आंत में लाभकारी बैक्टीरिया बढ़ाने और कुछ रोगाणुओं को आंत से चिपकने से रोकता है। छह माह तक गर्मी हो या सर्दी, शिशु को सिर्फ स्तनपान कराना चाहिए।