
मोची रामचेत को मिली सिलाई मशीन।
– फोटो : अमर उजाला
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कोर्ट में पेशी पर आए कांग्रेस सांसद व नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने लखनऊ जाते समय सुल्तानपुर जिले में एक मोची की दुकान पर कुछ वक्त गुजारा था। उन्होंने मोची रामचेत से बातें कीं, उनकी पेशे की परेशानी व आमदनी आदि को समझा और फिर चले गए। अगले ही दिन शनिवार को उनकी टीम के लोग रामचेत की दुकान पर पहुंचे और उन्हें राहुल गांधी की तरफ से जूता सिलने की मशीन भेंट की।
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यह पूरा वाकया यहां तक बिल्कुल ठीक था। किंतु सिलाई मशीन भेजने वाले राहुल गांधी को शायद इस बात का अहसास भी नहीं रहा होगा कि रामचेत इस मशीन का इस्तेमाल भला कैसे करेंगे? न तो उनकी दुकान में बिजली का कनेक्शन है और न ही उनकी झोपड़ी में बिजली का बल्ब रोशनी फैलाता है। यहां तक कि जिस फटेहाल झोपड़ी में रामचेत रहते हैं, वहां शायद बिजली का कनेक्शन लेना भी खतरे से खाली नहीं है। मशीन मिलने से खुश रामचेत उसे लेकर अपने गांव चले गए और उन्होंने कहा कि वे अपने बेटे के घर पर जाकर मशीन चलाएंगे, क्योंकि वहां बिजली कनेक्शन है।
किंतु इस पूरे घटनाक्रम ने सरकारी योजनाओं पर सवाल खड़े कर दिए हैं। रामचेत बताते हैं कि उन्हें किसी आवास योजना का लाभ नहीं मिला है। वे अपनी झोपड़ी में ही रहते हैं। मुफ्त बिजली कनेक्शन भी उन्हें नहीं मिला है। यहां तक कि राशन कार्ड पर उन्हें राशन मिलना भी बंद हो गया है।
राहुल के सवाल पर रामचेत बोले थे- बाबू मशीनै नाही है
रामचेत के पास जिस तरह से कांग्रेसी शनिवार को सिलाई मशीन लेकर पहुंचे थे, वह यों ही नहीं था। दरअसल जब शुक्रवार को राहुल गांधी रामचेत की दुकान पर बैठे थे, उस वक्त उन्होंने एक सुंदर सा जूता बना हुआ देखा था। उन्होंने रामचेत से पूछा कि यह जूता आप ही बनाते हो? रामचेत ने जवाब दिया था, नाहीं बाबू हमरे पास मशीनै नाही है, बाजार से सिला सिलाया लाइत है, फिर सोल लगाए के बेचित हैं। राहुल ने पूछा कि आखिर मशीन कितने की आती होगी? रामचेत ने जवाब दिया था कि 30-40 हजार कै आवत होई। यही वह वार्तालाप था, जिसके बाद राहुल ने रामचेत को मशीन भेंट करने का निर्णय लिया।
