अलीगंज में 22 जून को हुए भीषण अग्निकांड में हाईकोर्ट की लखनऊ पीठ ने राज्य सरकार को जवाबी हलफनामा दाखिल करने के लिए सप्ताह भर का समय दिया है। इसके बाद याचिकाकर्ता प्रतिउत्तर दाखिल कर सकेगा। अगली सुनवाई 24 अगस्त को होगी। न्यायमूर्ति राजन रॉय और न्यायमूर्ति मंजीव शुक्ला की खंडपीठ ने मंगलवार को यह आदेश अधिवक्ता शिवेंदु पांडेय की जनहित याचिका पर दिया।

याचिका में घटना की स्वतंत्र, समयबद्ध और न्यायालय की ओर से निगरानी करने वाली समिति के गठन के लिए निर्देश देने का अनुरोध किया गया है। राज्य सरकार की ओर से अपर महाधिवक्ता विनोद कुमार शाही ने बताया कि मामले में सरकार समुचित प्रभावी कार्रवाई कर रही है, जिससे आगे ऐसी घटनाएं न हों। शाही ने जवाब दाखिल करने के लिए समय देने का आग्रह किया। इस पर कोर्ट ने सप्ताह भर का समय दिया है।

अपर महाधिवक्ता ने पक्षकार अन्य विभागों से जानकारी लेकर बेहतर मानक संचालन प्रक्रिया (एसओपी) भी पेश करने की बात कही। कोर्ट ने 24 अगस्त से पहले एसओपी पेश करने का निर्देश दिया है। याचिका में उत्तर प्रदेश सरकार, भारत सरकार, उत्तर प्रदेश अग्निशमन एवं आपातकालीन सेवा महानिदेशक, लखनऊ के मुख्य अग्निशमन अधिकारी, नगर आयुक्त, एलडीए के उपाध्यक्ष, लखनऊ के जिला अधिकारी और पांच अन्य प्राधिकारियों को प्रतिवादी बनाया गया है।

इससे पहले कोर्ट ने राज्य सरकार को निर्देश दिया था कि भवन नियमों, अग्नि सुरक्षा के उपायों के पालन के साथ अफसरों, कर्मचारियों की जिम्मेदारी तय करके वह एसओपी पेश करे।

आवास एवं शहरी विकास विभाग के अपर मुख्य सचिव/प्रमुख सचिव, उप्र आवास विकास परिषद के आयुक्त, यूपी पावर कॉर्पोरेशन के प्रबंध निदेशक समेत प्रमुख सचिव ऊर्जा को भी पक्षकार बनाने के निर्देश दिए थे। कोर्ट ने सभी पक्षकारों को याचिका पर जवाबी हलफनामे दाखिल करने का आदेश दिया था।



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