राम मंदिर की दान पेटिकाओं से चोरी और वित्तीय अनियमितता के मामले में पुलिस ने जांच का दायरा बढ़ा दिया है। अब मंदिर के अलग-अलग लेजर और पुराने वित्तीय रिकॉर्ड खंगाले जा रहे हैं। लेजर में दर्ज प्रविष्टियों का अन्य दस्तावेजों से मिलान कर चढ़ावे की रकम के लेखा-जोखा और उसके रखरखाव की प्रक्रिया की जांच की जा रही है। आवश्यकता पड़ने पर संबंधित लोगों को सफीना (बुलावा पत्र) जारी कर पूछताछ की जा रही है।
मामले की जांच एसआईटी की निगरानी में सीओ अयोध्या कर रहे हैं। विवेचना के तहत मंदिर की व्यवस्था और प्रबंधन से जुड़े सभी पहलुओं की पड़ताल की जा रही है। इसी क्रम में चढ़ावे की रकम से जुड़े लेजर महत्वपूर्ण साक्ष्य के रूप में सामने आए हैं। पुलिस यह पता लगाने का प्रयास कर रही है कि दान की रकम का हिसाब किस प्रक्रिया के तहत तैयार किया जाता था, उसके रखरखाव और जमा करने की जिम्मेदारी किन लोगों की थी।
सूत्रों के अनुसार लेजर में दर्ज तारीख, रकम और अन्य विवरणों को उपलब्ध रिकॉर्ड से मिलाया जा रहा है। जिन प्रविष्टियों को लेकर स्थिति स्पष्ट नहीं हो रही है, उनके संबंध में संबंधित व्यक्तियों से जानकारी ली जा रही है। जांच में सामने आए तथ्यों को दस्तावेजों और बयानों के आधार पर परखा जा रहा है।
