उत्तर प्रदेश राज्य राजधानी क्षेत्र (यूपीएससीआर) में बिजली की बढ़ती मांग को पूरा करने के लिए अगले पांच वर्षों में 20 नए विद्युत उपकेंद्र बनाए जाएंगे। उत्तर प्रदेश पावर ट्रांसमिशन निगम ने इसकी योजना तैयार की है। इससे यूपीएससीआर के छह जिलों लखनऊ, सीतापुर, बाराबंकी, उन्नाव, रायबरेली और हरदोई में बिजली आपूर्ति अधिक मजबूत और निर्बाध होगी। मौजूदा समय में कई उपकेंद्रों पर क्षमता से अधिक भार होने से आपूर्ति प्रभावित हो रही है।

योजना के तहत लखनऊ के जेल रोड स्थित आईटी सिटी में 765 केवी क्षमता का विद्युत उपकेंद्र बनेगा, जो यूपीएससीआर का सबसे बड़ा उपकेंद्र होगा। इसके लिए 90 से 110 एकड़ भूमि की आवश्यकता होगी। परियोजना की अनुमानित लागत 2000 से 2200 करोड़ रुपये है। लखनऊ विकास प्राधिकरण (एलडीए) निर्माण के लिए जमीन उपलब्ध करा चुका है। अन्य उपकेंद्रों के लिए 12 से 50 एकड़ तक भूमि की जरूरत होगी।

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लखनऊ में वरुण विहार, सुल्तानपुर रोड और मोहनलालगंज में 400 केवी के उपकेंद्र प्रस्तावित हैं। वेलनेस सिटी, नैमिष नगर और सुमित्रा विहार योजना मोहनलालगंज में 220 केवी के उपकेंद्र बनेंगे। वहीं, टॉकटोरिया रोड और रायबरेली रोड पर 132 केवी के उपकेंद्र प्रस्तावित हैं।

वर्तमान में यूपीएससीआर में 765 केवी के दो, 400 केवी के तीन, 220 केवी के 17 और 132 केवी के 46 उपकेंद्र संचालित हैं। हरदोई के बघौली, शाहाबाद, श्रीमऊ, लखनऊ के गोमती नगर, मोहान रोड, आवास विकास, जेल रोड, सीतापुर के लहरपुर, महमूदाबाद और रायबरेली के बछरावां, अमावा, त्रिपुला व दलमऊ क्षेत्रों में उपकेंद्रों पर अधिक भार की समस्या है। नए उपकेंद्र बनने से इन क्षेत्रों को राहत मिलेगी।

इन जगहों पर भी बनाए जाएंगे नए उपकेंद्र

बाराबंकी, नवाबगंज, हैदरगढ़ व सीतापुर में 400-400 केवी, उन्नाव, रायबरेली, बछरावां, बांगरमऊ व पुरवा में 220-220 केवी और हरदोई में 132 केवी का उपकेंद्र बनाया जाएगा।

 

विद्युत वितरण निगम लिमिटेड के निदेशक (वाणिज्य) रजत जुनेजा का कहना है कि उपभोक्ताओं को राहत देने के लिए ये एक बड़ी योजना है। यदि किसी क्षेत्र में बड़ी फॉल्ट या पूरी लाइन में कोई खराबी है तो भी वैकल्पिक व्यवस्था के सहारे राहत दी जा सकेगी। इसके लिए केंद्र सरकार से भी बजट मिलना है। लखनऊ में जो 765 केवी उपकेंद्र बनेगा उसके लिए एलडीए ने जेल रोड पर जगह दे दी है। इसमें थोड़ा समय लग जाएगा।



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