झांसी। नगर निगम की ओर से निकाले गए आईईसी (सूचना, शिक्षा और संचार) और कैपेसिटी बिल्डिंग (क्षमता निर्माण) के टेंडर पर पार्षदों ने सवाल खड़े कर दिए हैं। नगर आयुक्त को सौंपे शिकायती पत्र में निविदा डालने के लिए बहुत कम समय देने की बात कहते हुए इसे निरस्त करने की मांग की है।
पार्षद विकास खत्री और महेश गौतम ने शिकायती पत्र में कहा कि आईईसी और कैपेसिटी बिल्डिंग दोनों ही अलग-अलग प्रकृति के कार्य हैं। इन दोनों मदों के लिए शासन की ओर से अलग-अलग बजट का प्रावधान किया जाता है। इसके बावजूद दोनों कार्यों को एक ही निविदा में शामिल कर दिया गया है। निविदा में ऐसी पात्रता शर्तें निर्धारित की गई हैं, जिनमें आईईसी और कैपेसिटी बिल्डिंग दोनों क्षेत्रों का अनुभव अनिवार्य कर दिया गया है। जबकि, प्रदेश के विभिन्न नगर निकायों में प्रचलित व्यवस्था के अनुसार आईईसी और कैपेसिटी बिल्डिंग के लिए अलग-अलग निविदाएं निकाली जाती हैं। निविदा के लिए मात्र 10 दिन का समय दिया गया है। कम समय देने से प्रतिस्पर्धा सीमित होने की आशंका है। पूर्व में नगर निगम की इस प्रकार की निविदाओं में ज्वाइंट वेंचर की अनुमति दी जाती रही है, जिससे विभिन्न क्षेत्रों की विशेषज्ञ फर्में संयुक्त रूप से भाग लेकर गुणवत्तापूर्ण प्रतिस्पर्धा कर सकें। लेकिन इस बार बिना किसी स्पष्ट कारण के ज्वाइंट वेंचर की अनुमति समाप्त कर दी गई है। इससे कई योग्य संस्थाएं निविदा में भाग लेने से वंचित हो गई हैं। पार्षदों ने नगर आयुक्त से निविदा को निरस्त करने आदि मांग की।
