उत्तर प्रदेश डिफेंस इंडस्ट्रियल कॉरिडोर के तहत कानपुर में बड़े स्तर पर डिफेंस एम्युनेशन, छोटे हथियारों और आर्टिलरी सिस्टम से जुड़े उत्पादों का निर्माण इस बदलाव को नई ताकत दे रहा है। इसी क्रम में अदाणी डिफेंस एंड एयरोस्पेस की उत्पादन क्षमता के विस्तार से न केवल गोला-बारूद के घरेलू उत्पादन को बढ़ावा मिल रहा है, बल्कि आयात पर निर्भरता घटाने के लक्ष्य को भी गति मिल रही है।
अदाणी डिफेंस एंड एयरोस्पेस के सीईओ आशीष राजवंशी ने बताया कि कानपुर के हाथीपुर क्षेत्र में करीब 250 एकड़ में यूनिट का विस्तार प्रस्तावित है। इसमें करीब 2000 करोड़ का निवेश किया जाएगा। कंपनी पहले ही कानपुर में करीब 4000 करोड़ का निवेश कर चुकी है। अगले कुछ वर्षों में करीब 4000 करोड़ और निवेश करने की योजना बना रही है।
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अदाणी डिफेंस एंड एयरोस्पेस के इस सेंटर में फिलहाल करीब 2000 कर्मचारी काम कर रहे हैं। प्रस्तावित विस्तार के बाद नए रोजगार के साथ लॉजिस्टिक्स और अन्य गतिविधियों में भी रोजगार के अवसर बढ़ेंगे। इकाई में हर साल करीब 15 करोड़ राउंड विभिन्न गोलियों का उत्पादन किया जा रहा है। इस निर्माण क्षमता को साल के अंत तक बढ़ाकर करीब 30 करोड़ करने का प्रयास है।
यहां विभिन्न प्रकार के एम्युनिशन का निर्माण और असेंबलिंग की जा रही है। इनमें राइफल और अन्य छोटे हथियारों में इस्तेमाल होने वाला स्मॉल-कैलिबर एम्युनिशन, टैंक और आर्टिलरी सिस्टम में इस्तेमाल होने वाला लार्ज-कैलिबर एम्युनिशन भी शामिल है। अगले साल से मीडियम-कैलिबर एम्युनिशन का उत्पादन भी शुरू करने की तैयारी है। इसका इस्तेमाल ऑटोकैनन और इसी तरह के अन्य हथियार प्रणालियों में होता है। अगले साल तक सालाना 40 लाख यूनिट ग्रेनेड उत्पादन होगा। वहीं 2029 तक 40 लाख यूनिट की अतिरिक्त क्षमता बढ़ाई जाएगी।
सीईओ आशीष राजवंशी ने कहा कि ऑपरेशन सिंदूर ने भारत के लिए अपनी क्षमताओं को स्वयं विकसित करने की जरूरत पर बल दिया। कानपुर यूनिट में विकसित अभय राइफल से 5.56 एमएम और 9 एमएम, दोनों प्रकार की गोलियां फायर करने में सक्षम है। प्रहार लाइट मशीन गन को सेना द्वारा काफी पसंद किया जा रहा है। यहां निर्मित गोला-बारूद और आर्टिलरी सिस्टम नाटो मानकों के अनुरूप हैं।
