नेपाल को पुनः हिंदू राष्ट्र घोषित करने की मुहिम अब नए चरण में पहुंच गई है। हिंदू राष्ट्र समर्थक संगठन संविधान संशोधन को अपनी मांग आगे बढ़ाने का रास्ता मान रहे हैं। नेपाल सरकार संविधान के विभिन्न प्रावधानों में बदलाव के लिए सुझाव जुटा रही है।
विश्व हिंदू परिषद (वीएचपी) नेपाल ने सरकार को लिखित प्रस्ताव दिया है। इसमें संविधान की धारा-4 से धर्मनिरपेक्ष शब्द हटाने का सुझाव है। वीएचपी नेपाल चाहता है कि नेपाल को सनातन धर्म-सापेक्ष हिंदू राष्ट्र के रूप में पुनर्स्थापित किया जाए। राष्ट्रीय प्रजातंत्र पार्टी (राप्रपा) भी संविधान संशोधन की बहस में हिंदू राष्ट्र के मुद्दे को शामिल कराने पर जोर दे रही है। सरकार के संविधान संशोधन कार्यदल ने 308 में से 245 धाराओं में बदलाव के सुझाव दिए हैं। हिंदू राष्ट्र समर्थक संगठनों ने इसी प्रक्रिया को अपनी मांग को सांविधानिक बहस में शामिल कराने का अवसर बनाया है। वीएचपी नेपाल मातृशक्ति विभाग की राष्ट्रीय अध्यक्ष कृष्णा पांडे ने यह जानकारी दी। उन्होंने बताया कि संगठन सनातन परंपरा में हिंदू, बौद्ध और किरात धार्मिक-सांस्कृतिक परंपराओं को शामिल करना चाहता है।
राप्रपा की सांविधानिक बहस में भागीदारी
राप्रपा अध्यक्ष राजेंद्र प्रसाद लिङ्देन के नेतृत्व में पार्टी ने प्रधानमंत्री बालेन शाह से मुलाकात की है। पार्टी ने हिंदू राष्ट्र, राजसंस्था और संघीय व्यवस्था से जुड़े मुद्दों को संविधान संशोधन की बहस में शामिल करने की मांग की है। राप्रपा का कहना है कि व्यापक संविधान संशोधन पर चर्चा हो तो नेपाल की धार्मिक-सांस्कृतिक पहचान पर भी बहस हो। यह संसद और राजनीतिक दलों में होनी चाहिए।
प्रस्तावित मॉडल में धार्मिक स्वतंत्रता
हिंदू राष्ट्र समर्थक खेमा प्रस्तावित मॉडल में धार्मिक स्वतंत्रता की बात भी रख रहा है। यह मांग केवल बहुसंख्यक हिंदू आबादी के आधार पर राज्य की पहचान बदलने की नहीं है। इसे सनातन सांस्कृतिक पहचान के साथ सभी धर्मों की स्वतंत्रता बनाए रखने वाले मॉडल के रूप में प्रस्तुत किया जा रहा है। वर्ष 2015 में लागू संविधान के बाद नेपाल धर्मनिरपेक्ष संघीय लोकतांत्रिक गणराज्य बना था। अब व्यापक संविधान संशोधन की चर्चा के बीच इस मांग ने नया रूप लिया है।
