राजस्व न्यायालयों में वर्षों से लंबित मुकदमों के निस्तारण को लेकर प्रशासनिक व्यवस्था पर सवाल उठाने वाला मामला सामने आया है। संयुक्त मजिस्ट्रेट व एसडीएम (न्यायिक) रिंकू सिंह राही ने करीब 38 वर्ष पुराने राजस्व वाद के निस्तारण में हो रही देरी को लेकर राजस्व परिषद के अध्यक्ष से माफीनामा प्रस्तुत करते हुए मामले में आवश्यक मार्गदर्शन मांगा है। एसडीएम न्यायिक ने अपने पत्र में पुराने वादों के लंबित रहने के पीछे न्यायालयीन व्यवस्था और मुकदमों के प्रबंधन से जुड़ी कई खामियों का भी उल्लेख किया है।
एसडीएम न्यायिक की ओर से राजस्व परिषद को भेजे गए पत्र में वाद संख्या टी-202606350307443, वीरेंद्र सिंह बनाम सुरेंद्र पाल सिंह आदि का उल्लेख किया गया है। यह मामला उत्तर प्रदेश राजस्व संहिता की धारा 24 से संबंधित है। पत्र के मुताबिक संबंधित मूल वाद वर्ष 1988 से चला आ रहा है, लेकिन करीब 35 वर्ष से अधिक समय बीतने के बावजूद इसका स्वरूप समाप्त नहीं हो सका। वर्ष 2026 में इस वाद को करीब 38 वर्ष पूरे हो चुके हैं। वर्तमान न्यायालय में भी यह वाद लगभग साढ़े तीन वर्ष से लंबित है। पत्र में बताया गया कि मुकदमे में पक्षकारों को न्याय दिलाने के लिए सही मुकाम का चयन, खतौनी-नक्शा एवं धरातल पर सेक्टर के क्षेत्रफल का मिलान, गाटा संख्या और मौके की स्थिति की जांच जैसे कई बिंदुओं पर कार्रवाई आवश्यक है।
