झांसी। नागपंचमी पर सांपों को टोकरी में कैद कर घर-घर जाकर रुपये वसूलने वाले सपेरों और बाबाओं के खिलाफ वन विभाग ने अभियान चलाया और 36 सांपों को रेस्क्यू कर उन्हें जंगलों में छोड़ दिया।
वनाधिकारी विकास यादव ने बताया कि नागपंचमी पर सपेरे और बाबा टोकरी में या फिर गले में डालकर घर-घर जाकर नागदेवता के नाम पर लोेगों से श्रद्धा के नाम से रुपये वसूलते हैं। इसके लिए पूरे जनपद के सभी सात रेंज के रेंजरों को टीम बनाकर अभियान चलाने के निर्देश दिए थे। टीम ने सभी रेंज में दबिश और 36 सांप बरामद किएए। उन्होंने बताया कि सपेरे और बाबा ऐसे सांपों को पकड़ते हैं इनके जहर की पोटली निकालते हुए उसके दांत तोड़ देते हैं। इससे सांप के अंदर जहर नहीं होता है। ऐसे सांपों को लेकर वह घर-घर जाते हैं। सोमवार को महानगर में चलाए गए अभियान के तहत 36 सांपों को मय टोकरी के बरामद कर उन्हें आसपास के जंगलों में सुरक्षित छोड़ दिया गया है। इसमें से अधिकांश किंग कोबरा और दोमुंहा शामिल थे। वनाधिकारी के अनुसार मान्यता है कि नागपंचमी पर दूध पिलाया जाता है पर ऐसा नहीं है क्योंकि जब सांप दूध पीता है, तो वह उसकी आंतों में जाकर सड़ने लगता है। इससे सांप को पेट फूलना, निमोनिया और गंभीर इंफेक्शन जैसी बीमारियां हो जाती हैं और अंत में उसकी मृत्यु हो जाती है।
