बसपा प्रमुख मायावती ने सपा पर तीखा हमला बोलते हुए उसे गठबंधन की राजनीति में स्वार्थ साधने वाली पार्टी करार दिया है। उन्होंने कहा कि सपा गठबंधन के समय सहयोगियों को साथ लेकर अपना काम निकालती है और काम निकलते ही गिरगिट की तरह रंग बदल लेती है। मायावती ने सपा के एक प्रमुख नेता की ओर से राष्ट्रीय लोकदल और उसके नेता के खिलाफ दिए गए बयान को अपमानजनक बताते हुए पूरे जाट समाज से माफी मांगने की मांग की।
मायावती ने कहा कि सपा का राजनीतिक चरित्र विरोधी दलों के साथ ही सहयोगियों के लिए भी संकीर्णता, जातिवादी द्वेष और अविश्वास से भरा रहा है। उन्होंने आरोप लगाया कि सपा की इसी राजनीति का फायदा अक्सर भाजपा को मिला और धर्मनिरपेक्ष ताकतें कमजोर हुईं। बसपा प्रमुख ने 1993 के सपा-बसपा गठबंधन से लेकर 1995 के लखनऊ राज्य अतिथि गृह कांड और फिर 2019 के सपा-बसपा गठबंधन तक का जिक्र कर अखिलेश यादव को भी निशाने पर लिया। उन्होंने कहा कि अखिलेश ने पिता मुलायम सिंह यादव की पुरानी गलतियां नहीं दोहराने का भरोसा दिया, लेकिन चुनावी नतीजे उम्मीद के मुताबिक नहीं आने पर कुछ समय बाद बसपा के प्रति वही अहंकार और स्वार्थ सामने आ गया और गठबंधन टूट गया।
