झांसी। इंस्टीट्यूट ऑफ चार्टर्ड अकाउंटेंट्स ऑफ इंडिया की प्रोफेशनल डेवलपमेंट कमेटी की ओर से शनिवार को ‘व्यावहारिक समस्याएं एवं टैक्स ऑडिट में कृत्रिम बुद्धिमत्ता का उपयोग’ विषय पर कार्यशाला का आयोजन किया गया। विशेषज्ञों ने टैक्स ऑडिट की चुनौतियों, फॉर्म की रिपोर्टिंग, अनुपालन से जुड़े उपयोगी बिंदुओं और एआई के प्रभावी उपयोग की जानकारी दी।
आईसीएआई झांसी शाखा के अध्यक्ष जयंत मणि जैन ने कहा कि टैक्स ऑडिट केवल वैधानिक जिम्मेदारी नहीं है, बल्कि यह व्यावसायिक जिम्मेदारी, तकनीकी ज्ञान और निर्णय क्षमता की भी परीक्षा है। उन्होंने कहा कि टैक्स ऑडिट का सीजन शुरू हो चुका है, इसलिए सदस्यों को कानून की जानकारी के साथ उसके व्यावहारिक इस्तेमाल की भी आवश्यकता होती है। ऐसी कार्यशालाओं से वास्तविक कामकाज के दौरान आने वाली समस्याओं का समाधान सीधे विशेषज्ञों से मिल जाता है।
आईसीएआई के केंद्रीय परिषद सदस्य अभय छाजेड़ ने चार्टर्ड अकाउंटेंसी के बदलते स्वरूप और तकनीकी विकास पर अपने विचार रखे। कार्यशाला के पहले तकनीकी सत्र में दिल्ली से आए विशेषज्ञ पंकज के. मिश्रा ने ‘टैक्स ऑडिट में आने वाली व्यावहारिक समस्याएं’ विषय पर विस्तार से जानकारी दी। दूसरे तकनीकी सत्र में पुनीत सखूजा ने ‘टैक्स ऑडिट में एआई के उपयोग’ पर प्रकाश डाला।
इस मौके पर जेपी अग्रवाल, संजीव अग्रवाल, आनंद सक्सेना, गौरव गुप्ता, रचित अग्रवाल, राकेश विजय, राधेश्याम व्यास, निरपेंद्र शर्मा और सागर अत्री समेत बड़ी संख्या में चार्टर्ड अकाउंटेंट मौजूद रहे।
