शुभम अवस्थी, अमर उजाला नेटवर्क, लखनऊ
Published by: Akash Dwivedi

Updated Mon, 24 Aug 2026 12:36 PM IST

लखनऊ में करीब 11 साल पुराने कच्ची शराब मामले में अदालत ने पर्याप्त साक्ष्य न मिलने पर एक आरोपी को बरी कर दिया। न उसे मौके से पकड़ा गया, न उसके पास से बरामदगी हुई और न स्वतंत्र गवाह मिला। अदालत ने कहा कि केवल सह आरोपी के बताए नाम से अपराध सिद्ध नहीं होता।


UP: Bizarre case in Lucknow—a young man was named an accused solely based on someone mentioning his name

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– फोटो : X/fazenda_dom_pedro



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सिर्फ नाम बताए जाने पर पुलिस ने सत्यनारायण को कच्ची शराब के मामले में आरोपी बना दिया। करीब 11 साल तक मुकदमा चला लेकिन अदालत में उनके खिलाफ न मौके से गिरफ्तारी का साक्ष्य मिला, न कोई बरामदगी और न ही स्वतंत्र गवाह। साक्ष्यों के अभाव में अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश नीरज कुमार बरनवाल ने सत्यनारायण को सभी आरोपों से दोषमुक्त कर दिया।


अभियोजन के मुताबिक मड़ियांव पुलिस 13 जनवरी 2015 को वीरमपुर में गश्त कर रही थी। इसी दौरान मुखबिर ने वीरमपुर में रहने वाले राजू के घर के पीछे दो लोगों के अवैध रूप से कच्ची शराब बनाने और बेचने की सूचना दी। पुलिस ने दबिश दी तो मड़ियांव के हिरनखुरी निवासी परशुराम को चार लीटर कच्ची शराब से भरी पिपिया के साथ पकड़ लिया। उसका दूसरा साथी गन्ने के खेत से होकर भाग गया।

 

 



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