उरई। जिले में खाद्य पदार्थों में मिलावट का खेल किस हद तक पैर पसार चुका है कि हर दूसरा नमूना फेल हो रहा है। इसकी तस्वीर खाद्य सुरक्षा एवं औषधि प्रशासन विभाग की जांच रिपोर्ट के अनुसार है।

दरअसल, पिछले और चालू वित्तीय वर्ष में विभाग की टीमों ने 597 निरीक्षण किए और अलग-अलग खाद्य पदार्थों के 81 नमूने जांच के लिए प्रयोगशाला भेजे। इनमें से अभी तक सिर्फ 31 नमूनों की जांच रिपोर्ट विभाग को मिल सकी है। इन 31 रिपोर्टों में 16 नमूने फेल पाए गए, जबकि महज 15 नमूने ही मानक के अनुरूप मिले। यानी प्रयोगशाला से आई रिपोर्ट के आंकड़ों के हिसाब से हर दूसरा नमूना फेल हो रहा है। सबसे गंभीर बात यह है कि 50 नमूनों की जांच रिपोर्ट अभी तक नहीं आई है। ऐसे में यह सवाल भी खड़ा हो रहा है कि लंबित नमूनों में कितने खाद्य पदार्थ मानक पर खरे उतरेंगे और कितनों में मिलावट सामने आएगी।

त्योहारों का दौर शुरू होते ही बाजार में खाद्य पदार्थों की मांग बढ़ जाती है। दूध, पनीर, मिठाई, खाद्य तेल, बेकरी उत्पाद समेत कई चीजों की बिक्री कई गुना बढ़ जाती है। इसी दौरान मिलावटखोर भी सक्रिय हो जाते हैं। खाद्य सुरक्षा विभाग की टीमें बाजारों में निरीक्षण कर नमूने तो लगातार ले रही हैं, लेकिन प्रयोगशाला से रिपोर्ट आने में हो रही देरी कार्रवाई की रफ्तार पर ब्रेक लगा रही है। नमूना लेने के बाद रिपोर्ट आने तक संबंधित खाद्य पदार्थ बाजार में बिकता रहता है। यदि उसमें मिलावट होती भी है तो समय रहते उसके खिलाफ कार्रवाई नहीं हो पाती।

खाद्य तेल और बेकरी उत्पादों में ज्यादा गड़बड़ी

फेल पाए गए नमूनों में अधिकांश खाद्य तेल और बेकरी उत्पादों के बताए जा रहे हैं। खाद्य तेल का इस्तेमाल लगभग हर घर में रोजाना होता है, जबकि बेकरी उत्पादों की खपत भी लगातार बढ़ रही है। ऐसे में इन उत्पादों के नमूने फेल होना उपभोक्ताओं की सेहत और खाद्य सुरक्षा व्यवस्था दोनों के लिए चिंता का विषय है।

कार्रवाई से पहले ही बाजार में खप जाता है माल

खाद्य पदार्थ का नमूना लेने के बाद उसकी जांच रिपोर्ट आने में यदि लंबा समय लग जाए तो संबंधित दुकान या प्रतिष्ठान पर मौजूद उसी बैच का अधिकांश माल बिक सकता है। बाद में रिपोर्ट फेल आने पर कार्रवाई की स्थिति में विभाग के सामने भी चुनौती रहती है कि संबंधित खाद्य सामग्री कितनी मात्रा में बाजार में पहुंच चुकी है। यही वजह है कि जांच रिपोर्ट समय से मिलना मिलावट के खिलाफ अभियान की सबसे अहम कड़ी है।

वर्जन

मोबाइल वैन के जरिये लगातार जांचें की जा रही हैं। 81 नमूने जांच के लिए भेजे गए थे, इसमें 16 फेल हो गए हैं। कई जांचों की रिपोर्ट आने शेष है। नियमानुसार कार्रवाई की जा रही है। – विनोद कुमार राय, खाद्य अधिकारी।



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