उरई। रेलवे की चादरों की फेरी कर बिक्री से संबंधित एक्स सामने आने के बाद आरपीएफ ने ऑपरेशन रेलवे सुरक्षा के तहत कार्रवाई करते हुए जालौन के अमखेड़ा गांव से 930 चादरें बरामद की हैं। इनमें 690 चादरों पर उत्तर पश्चिम रेलवे और 70 पर पूर्वोत्तर रेलवे का मार्का मिला, जबकि अन्य चादरें भी रेलवे की बताई गई हैं। तीन लोगों के खिलाफ रेलवे एक्ट के तहत मामला दर्ज कर जांच शुरू की गई है।
आरपीएफ के अनुसार एक्स में व्यक्ति को जालौन का निवासी बताया गया था और रेलवे की चादरों पर उत्तर पश्चिम रेलवे का मार्का दिखाई दे रहा था। ट्वीट में भिंड-लहार क्षेत्र में इन चादरों की फेरी कर बिक्री किए जाने की बात सामने आई थी। इसके बाद सहायक सुरक्षा आयुक्त आरपीएफ ग्वालियर अशोक कुमार त्यागी के निर्देशन में आरपीएफ भिंड के निरीक्षक अभिषेक कुमार यादव के नेतृत्व में टीम गठित की गई। टीम में भिंड के उपनिरीक्षक धीरेंद्र पाल सिंह, मोंठ के उपनिरीक्षक जयपाल यादव, उरई के उपनिरीक्षक अंकित कुमार, प्रधान आरक्षक धर्मेंद्र कुमार पटेल, नरेंद्र कुमार सिंह व परशुराम शामिल रहे। टीम ने भिंड-लहार क्षेत्र में चादरों की फेरी करने वालों के बारे में जानकारी जुटाई। जांच के दौरान जालौन के अमखेड़ा निवासी अमरचंद और हेमंत को चिह्नित किया गया।
आरपीएफ टीम अमखेड़ा पहुंची और अमरचंद के घर की तलाशी ली। वहां अलग-अलग रेलवे मार्का वाली चादरों की नौ गांठें मिलीं। बरामद चादरों में 690 पर उत्तर पश्चिम रेलवे और 70 पर पूर्वोत्तर रेलवे का मार्का था। कुल 930 चादरें बरामद हुईं। अमरचंद ने कुछ चादरों के बिल भी प्रस्तुत किए, जिन्हें सत्यापन के लिए टीम अपने साथ लेकर उरई स्थित नारायणदास टेक्सटाइल पहुंची। यहां फर्म संचालक अखिलेश मिले। उन्होंने गोदाम दिखाया, जहां अलग-अलग रेलवे की काफी संख्या में रिजेक्टेड चादरें रखी मिलीं। अखिलेश ने चादरों की खरीद से संबंधित बिल कानपुर और आगरा की फर्मों के होने की जानकारी दी और दस्तावेज भी उपलब्ध कराए। हालांकि रेलवे मार्का वाली चादरों से संबंधित बिल प्रस्तुत नहीं किए जा सके। इसके बाद आरपीएफ ने अमरचंद, हेमंत और अखिलेश के खिलाफ एक्ट के तहत मामला दर्ज कर अग्रिम जांच शुरू कर दी। बरामद रेलवे चादरों की अनुमानित कीमत 32550 रुपये आंकी गई है।
