भाई-बहन के अटूट प्रेम और स्नेह का प्रतीक रक्षाबंधन पर्व आज यानी शुक्रवार को हर्षोल्लास के साथ मनाया जा रहा है। इस बार रक्षाबंधन पर भद्रा का साया नहीं है। इससे पूरे दिन राखी बांधने का शुभ मुहूर्त है। साथ ही, आज लगने वाले चंद्र ग्रहण की भारत में दृश्यता न होने से इसका सूतक काल भी मान्य नहीं है। धार्मिक अनुष्ठानों पर कोई प्रतिबंध नहीं है।
अलीगंज स्थित स्वास्तिक ज्योतिष केंद्र के ज्योतिषाचार्य एसएस नागपाल और केंद्रीय संस्कृत विश्वविद्यालय के ज्योतिष विभाग के आचार्य डॉ. अश्विनी पांडेय के अनुसार, इस बार पर्व भद्रा काल से मुक्त है। 28 अगस्त की सुबह भद्रा समाप्त हो चुकी है। पूर्णिमा तिथि प्रातः 09:48 बजे तक ही है, फिर भी उदय तिथि और कुलाचार के अनुसार रक्षाबंधन पूरे दिन मनाया जा सकता है।
राहुकाल का रखें ध्यान
प्रातः 10:31 बजे से दोपहर 12:07 बजे तक राहुकाल रहेगा। शास्त्रों के अनुसार, राहुकाल में शुभ कार्य वर्जित होते हैं, इसलिए इस समय राखी बांधने से बचने की सलाह दी गई है।
27 को ही समाप्त हो गया भद्रा काल
- भद्रा का साया: 27 अगस्त को प्रातः 09:08 बजे से शुरू होकर रात्रि 09:32 बजे समाप्त हो गया।
- पूर्णिमा तिथि का प्रारंभ: 27 अगस्त को प्रातः 09:08 बजे।
- पूर्णिमा तिथि का समापन: 28 अगस्त को प्रातः 09:48 बजे।
राखी बांधते समय इस मंत्र का जाप शुभ
रक्षाबंधन के दिन रक्षासूत्र बांधते समय इस पौराणिक मंत्र का उच्चारण करना शुभ माना जाता है। ऐसे में ओम येन बद्धो बली राजा दानवेंद्रों महाबलः। तेन त्वामपि बध्नामि रक्षे मा चल मा चल का जाप करना चाहिए।
भारत में नहीं दिखेगा चंद्र ग्रहण, सूतक काल निष्प्रभावी
28 अगस्त को खंड चंद्र ग्रहण (आंशिक चंद्र ग्रहण) भी लग रहा है, जो प्रातः 08:04 बजे से प्रारंभ होकर दोपहर 11:22 बजे तक रहेगा। ज्योतिषाचार्य के अनुसार, यह ग्रहण भारत, नेपाल, श्रीलंका, बांग्लादेश, चीन और जापान सहित एशिया के अधिकांश हिस्सों में दिखाई नहीं देगा। यह ग्रहण उत्तर व दक्षिण अमेरिका, यूरोप, अफ्रीका और प्रशांत व अटलांटिक महासागर क्षेत्रों में दिखेगा। भारत में अदृश्य होने की वजह से इसका सूतक काल या कोई भी अशुभ प्रभाव मान्य नहीं होगा, और सभी धार्मिक व मांगलिक कार्य सामान्य रूप से किए जा सकेंगे।
