स्वाइन फ्लू यानी एच1एन1 संक्रमण शुरुआत में सामान्य फ्लू जैसा ही नजर आता है, लेकिन गंभीर होने पर यह फेफड़ों को बुरी तरह प्रभावित कर सकता है। कई मामलों में बुखार से नहीं, बल्कि संक्रमण के कारण सांस लेने में गंभीर दिक्कत और शरीर के दूसरे अंगों के प्रभावित होने से मरीज की मौत हो जाती है।
एच1एन1 वायरस फेफड़ों तक पहुंचकर उनकी छोटी वायु थैलियों (एल्वियोली) में सूजन पैदा कर सकता है। गंभीर संक्रमण में इनमें तरल भरने लगता है और खून में ऑक्सीजन की मात्रा तेजी से गिर सकती है। इससे निमोनिया और एक्यूट रेस्पिरेटरी डिस्ट्रेस सिंड्रोम जैसी गंभीर स्थिति बन सकती है। यही मौत की प्रमुख वजहों में शामिल है। यह जानकारी केजीएमयू के पल्मोनरी एवं क्रिटिकल केयर विभाग के एचओडी डॉ. वेद प्रकाश ने दी।
खुद की इम्यूनिटी सिस्टम ही साबित होती है दुश्मन
उन्होंने बताया कि गंभीर संक्रमण में शरीर की प्रतिरक्षा प्रणाली बहुत तेज प्रतिक्रिया कर सकती है। स्वाइन फ्लू में कई बार खुद की इम्यूनिटी सिस्टम ही दुश्मन साबित होती है। इससे फेफड़ों में सूजन और ऊतक क्षति बढ़ सकती है। स्थिति बिगड़ने पर संक्रमण और ऑक्सीजन की कमी का असर हृदय, किडनी समेत दूसरे अंगों पर भी पड़ सकता है और मल्टी ऑर्गन फेल्योर का खतरा बढ़ जाता है।
इन मरीजों में ज्यादा खतरा
डॉ. वेद प्रकाश के मुताबिक, बुजुर्ग, गर्भवती महिलाएं, छोटे बच्चे और डायबिटीज, अस्थमा, हृदय या किडनी की बीमारी वाले मरीजों में गंभीर संक्रमण का खतरा अधिक रहता है। ऐसे मरीजों में सांस फूलना, लगातार तेज बुखार या ऑक्सीजन कम होना दिखे तो तत्काल चिकित्सकीय जांच जरूरी है।
