पश्चिमी उत्तर प्रदेश में जाट राजनीति के जरिये अपनी पहचान बनाने वाले राष्ट्रीय लोकदल (रालोद) ने अब ब्राह्मण मतदाताओं के बीच भी राजनीतिक जमीन मजबूत करने की कवायद तेज कर दी है। सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव और रालोद अध्यक्ष जयंत चौधरी के बीच बढ़ती तल्खी के बीच 30 अगस्त को लखनऊ में होने वाला रालोद का राष्ट्रीय सम्मेलन इसी रणनीति का अहम हिस्सा माना जा रहा है। सम्मेलन में करीब 1500 ब्राह्मणों को जुटाने की तैयारी है।
पूर्वांचल के कद्दावर ब्राह्मण नेता बीके शुक्ला की मौजूदगी के साथ रालोद राजधानी से सपा को सियासी चुनौती देगा। यह पहली बार है जब जयंत चौधरी लखनऊ में इतने बड़े स्तर पर पार्टी का सम्मेलन कर रहे हैं। हाल में सपा ने जनेश्वर मिश्र की जयंती के जरिये ब्राह्मण समाज को राजनीतिक संदेश दे चुकी है। ऐसे में ब्राह्मणों की बड़ी भागीदारी वाला जयंत का सम्मेलन महत्वपूर्ण माना जा रहा है। जयंत के मंच पर पहुंचने के दौरान 21 बटुक स्वस्तिवाचन करेंगे।