उत्तर प्रदेश में बिजली चोरी की दर में करीब 18 फीसदी की कमी आई है। पिछले दिनों 372 विद्युत फीडरों को चिह्नित कर अभियान चलाया गया था। इसमें लंबे समय से विद्युत बिल जमा न करने वालों से करीब 614.86 करोड़ वसूला गया। अभियान से हर निगम में हानियां कम हुई हैं।
यहां-यहां घटीं राजस्व हानियां: दक्षिणांचल में राठ, चित्रकूट, कोसी, अतर्रा, दिबियापुर, ललितपुर आदि फीडरों पर जुलाई 2026 तक राजस्व हानि 22.53 करोड़ रुपये से घटकर 17.89 करोड़ हो गई। यानी 21 प्रतिशत की कमी आई है। पश्चिमांचल में देवबंद, ज्योतिबा नगर, खुर्जा, ग्रेटर नोएडा आदि क्षेत्र में 29 प्रतिशत, केस्को के दादानगर, आलूमंडी, रतनपुर एवं कल्याणपुर आदि फीडरों पर 58 प्रतिशत, मध्यांचल में शाहाबाद, गोंडा, सुलतानपुर, आंवला, बहेड़ी आदि फीडरों पर 68 प्रतिशत, पूर्वांचल के बैरिया, गोपीगंज, प्रयागराज, बलिया, फूलपुर फीडरों पर 22 प्रतिशत की कमी हुई है।
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जांच रिपोर्ट की विश्वसनीयता पर उपभोक्ता परिषद ने उठाए सवाल
राज्य विद्युत उपभोक्ता परिषद के अध्यक्ष अवधेश कुमार वर्मा ने स्मार्ट प्रीपेड मीटर जांच व्यवस्था पर सवाल उठाया है। उनका कहना है कि स्मार्ट प्रीपेड मीटर मामले में पॉवर कॉर्पोरेशन की उच्चस्तरीय जांच समिति ने जिस व्यवस्था की तारीफ की है, उसी व्यवस्था पर नियामक आयोग जुर्माना लगा चुका है।
उन्होंने बताया कि उपभोक्ताओं द्वारा रिचार्ज करने के बाद अधिकतम दो घंटे में बिजली कनेक्शन बहाल होना चाहिए था, लेकिन 1.93 लाख से अधिक प्रीपेड स्मार्ट मीटर उपभोक्ताओं के कनेक्शन दो घंटे से अधिक समय तक कटे रहे। इस गंभीर मामले में विद्युत नियामक आयोग ने पावर कार्पोरेशन पर 7.18 लाख का जुर्माना लगाया है।
उन्होंने कहा कि जांच समिति ने सभी डिस्कॉम में मॉनिटरिंग सेल बनाने तथा कनेक्शन काटने-जोड़ने, सफल रिचार्ज के बाद बिजली बहाली और शिकायतों के त्वरित समाधान के लिए उठाए गए कदमों को सराहा है। यह विरोधाभास है। ऐसे में उच्चस्तरीय जांच समिति की पूरी रिपोर्ट सार्वजनिक की जाए और स्वतंत्र एजेंसी से जांच कराई जाए।
