लखनऊ। आशियाना दिगंबर जैन मंदिर परिसर में अहंकार को तोड़ने और विनय, नम्रता और समर्पण का भाव जागृत करने के प्रतीक 35 फीट ऊंचे भव्य मानस्तंभ के निर्माण की शुरुआत रविवार को भव्यता से हुई। धूमधाम से भूमि पूजन एवं नींव पूजन किया गया। इसके बाद जैन धर्म के 24 तीर्थंकर भगवंतों वाले मानस्तंभ का निर्माण शुरू हुआ। इस दौरान भक्ति में काफी उत्साह देखने को मिली।
मुनि उपाध्याय 108 श्री वीहसंत सागर महाराज के सान्निध्य में विधि-विधानपूर्वक भूमि पूजन एवं नींव पूजन संपन्न हुआ। सभी धार्मिक क्रियाएं दमोह से आए प्रतिष्ठाचार्य आशीष जैन ने मंत्रोच्चारण के साथ विधिवत संपन्न कराईं। इस अवसर पर उपाध्याय श्री वीहसंत सागर महाराज ने कहा कि मंदिर का पूर्ण विकास तभी माना जाता है, जब मंदिर परिसर में शिखर के साथ मान का मर्दन करने वाला मानस्तंभ भी स्थापित हो। मानस्तंभ मनुष्य को अहंकार का त्याग कर विनय, नम्रता और धर्म के मार्ग पर चलने की प्रेरणा देता है।
मीडिया प्रभारी सिद्धार्थ जैन ने बताया कि पूजन एवं नींव पूजन कार्यक्रम में नेहा जैन, रोमा जैन, गुंजन जैन, महावीर जैन, कैलाशचंद जैन कागजी, मनोज जैन, महिमा जैन एवं नैंसी जैन सहित अनेक श्रद्धालुओं ने प्रमुख पात्र बनकर पूजन करने का सौभाग्य प्राप्त किया।
सफेद संगमरमर से हो रहा निर्माण
मानस्तंभ का निर्माण राजस्थान के मकराना से आए कुशल कारीगर सफेद संगमरमर से कर रहे हैं। करीब 12 फीट व्यास वाले इस 35 फुट ऊंचे मानस्तंभ को लगभग दो माह में तैयार करने का लक्ष्य रखा गया है। वर्षा योग के समापन के पश्चात नवंबर में भव्य प्राण-प्रतिष्ठा एवं प्रतिष्ठा महोत्सव होगा। इस भव्य मानस्तंभ के मुख्य पुण्यार्जक परिवार चंद्र प्रकाश जैन, मनोज जैन-आभा जैन, मनोज -समता जैन एवं अभय शाह जैन हैं। पुण्यार्जक परिवारों की ओर से मानस्तंभ के निर्माण का पूरा खर्च वहन किया जाएगा। परिवारों ने इसे धर्म एवं समाज के लिए अपना सौभाग्य बताते हुए निर्माण में सहयोग का संकल्प लिया।
मानस्तंभ की विशेषताएं
जब किसी तीर्थंकर को केवलज्ञान (सर्वोच्च ज्ञान) प्राप्त होता है तो देवगण उनके उपदेश स्थल समवशरण की रचना करते हैं। इसकी चारों दिशाओं में अत्यंत भव्य मानस्तंभ बनाए जाते हैं। स्तंभ के सबसे ऊपरी सिरे (शिखर) पर एक चौमुखी छोटा मंडप या छत्र होता है, जिसमें चारों दिशाओं में तीर्थंकरों (विशेषकर भगवान महावीर या भगवान ऋषभदेव) की पद्मासन या खड्गासन मुद्रा में प्रतिमाएं विराजमान होती हैं। डालीगंज सि्थत जैन मंदिर के बाद यह दूसरा मंदिर है जहां मानस्तंभ का निर्माण किया जा रहा है।

भूमि पूजन से शुरू हुआ 35 फीट ऊंचे मानस्तंभ का निर्माण

भूमि पूजन से शुरू हुआ 35 फीट ऊंचे मानस्तंभ का निर्माण
