झांसी। महारानी लक्ष्मीबाई मेडिकल कॉलेज में 51 बेड के नवजात शिशु गहन चिकित्सा केंद्र (एनआईसीयू) को अग्नि एवं विद्युत सुरक्षा के लिहाज से सुरक्षित बनाने का काम पांच महीने से अटका हुआ है। कॉलेज प्रशासन की ओर से बीते मार्च में ही कार्यदायी संस्था यूपीपीसीएल के खाते में पैसा भी भेज चुके हैं। अब कॉलेज प्रधानाचार्य ने यूपीपीसीएल को पत्र लिखकर नाराजगी जताई है।
मेडिकल कॉलेज के एनआईसीयू में विद्युतीकरण, फायर फाइटिंग और फायर अलार्म सिस्टम स्थापित किया जाना है। तकनीकी समिति ने इसकी अनुमानित लागत 2.14 करोड़ रुपये आंकी थी। इसके बाद कॉलेज प्रशासन ने मार्च 2026 में 1.78 करोड़ रुपये कार्यदायी संस्था को उपलब्ध भी करा दिए थे। इसके बावजूद अब तक काम शुरू नहीं हो पाया।
अब कॉलेज प्रधानाचार्य डॉ. सुधीर कुमार ने यूपीपीसीएल के परियोजना प्रबंधक को लिखे पत्र में कहा है कि अब तक संस्था द्वारा एमओयू की कार्रवाई पूर्ण नहीं की गई है और न ही काम शुरू कराया गया है। उच्चाधिकारियों की ओर से समय-समय पर बैठक कर कार्यों की प्रगति की समीक्षा की जाती है। कार्य शुरू न होने पर अप्रसन्नता व्यक्त की जा रही है। ऐसे में अग्नि सुरक्षा और विद्युत सुरक्षा की दृष्टि से इस कार्य को प्राथमिकता पर पूरा कराएं। किसी प्रकार की अप्रिय स्थिति उत्पन्न होती है तो संस्था स्वयं जिम्मेदार होगी।
नवंबर 2024 में हुई थी अग्निकांड की घटना
नवंबर 2024 में मेडिकल कॉलेज के नवजात गहन चिकित्सा कक्ष में भीषण आग लगने की घटना हो चुकी है, जिसमें कई नवजातों की मौत हुई थी। घटना के बाद अस्पताल में अग्नि सुरक्षा व्यवस्था को लेकर गंभीर सवाल उठे थे।
कार्यदायी संस्था के अधिकारी से फोन पर हुई वार्ता के दौरान जल्द काम शुरू करने की बात कही गई है। लगभग दो महीने में यह काम पूरा हो जाएगा।
– डॉ. सुधीर कुमार, प्रधानाचार्य, मेडिकल कॉलेज।
