झांसी। जनपद में पिछले चार महीनों में बिजली के करंट से 12 लोगों की जान चली गई है। इस दौरान 10 पशुओं की भी मौत हुई और लाखों रुपये की फसलें जलकर राख हो गईं। विद्युत सुरक्षा विभाग ने इन घटनाओं की रिपोर्ट मुख्यालय भेज दी है, लेकिन कई प्रभावित परिवारों को अभी तक मुआवजा नहीं मिला है।
यह नुकसान अप्रैल 2026 से अगस्त तक के वित्तीय वर्ष में दर्ज किया गया है। विद्युत सुरक्षा के अधिकारियों के अनुसार, मानव मृत्यु पर 10 लाख रुपये का मुआवजा मिलता है। पशुओं की मौत पर 50 हजार रुपये देने का प्रावधान है। कुछ पीड़ितों को मुआवजा मिलने की बात भी सामने आई है।
जनपद में चार अलग-अलग स्थानों पर गेहूं की लाखों रुपये की फसलें जल गईं। गुरसराय में 29 मार्च को किसान मातादीन के गेहूं के खेत में आग लगी थी। चिरगांव के सिया गांव में 3 अप्रैल को बद्री प्रसाद की गेहूं की फसल जल गई। गरौठा में 12 अप्रैल को प्रेम नारायण का गेहूं जला। करारी में 13 मई को राहुल अहिरवार का गेहूं भी आग की चपेट में आया था।
करंट से हुई मौतें
रक्सा में 2 मई को बिजली के संविदा कर्मी रोहित राजपूत की करंट लगने से मौत हुई थी। अप्रैल में रक्सा कस्बे में मुकेश की भी करंट लगने से जान चली गई थी। मऊरानीपुर में भगवानदास ने करंट लगने से दम तोड़ दिया था। इसी कस्बे में किसान हरिशंकर की भी मौत हो गई थी। बबीना ब्लॉक के मथुरापुरा में देवी सिंह और सरमनपाल की करंट से जान चली गई थी।
विभाग को आख्या भेज दी है
विद्युत सुरक्षा के उप निदेशक चंद्र भूषण चौबे के अनुसार, बिजली के करंट से मानव या पशु की मौत पर आख्या तैयार की जाती है। मुआवजा राशि एक माह के अंदर देने का प्रावधान है। अप्रैल से अब तक हुई मौतों की आख्या विभाग को भेज दी गई थी। हालांकि, इनमें से किसी को भी मुआवजा मिलने की सूचना नहीं है।
