उरई। प्राथमिक विद्यालय अमखेड़ा में पढ़ाई अब ब्लैकबोर्ड और किताबों तक सीमित नहीं है। इंचार्ज प्रधानाध्यापक विपिन उपाध्याय ने सीमित संसाधनों में आधुनिक शिक्षा का माहौल बनाया है। उनका प्रयास बच्चों में सवाल पूछने, नई चीजें सीखने और बड़े सपने देखने की सोच विकसित करने पर केंद्रित है।
विपिन उपाध्याय ने सॉफ्टवेयर कंपनी की नौकरी छोड़कर शिक्षा का रास्ता चुना। उन्होंने स्वामी विवेकानंद इंटर कॉलेज से पढ़ाई की और ग्वालियर से बीएसए किया। दिल्ली की एक सॉफ्टवेयर कंपनी में बेहतर कॅरिअर के विकल्प होने के बावजूद वे शिक्षा क्षेत्र में आए। वर्ष 2012 में डायट पिंडारी से बीटीसी प्रशिक्षण पूरा किया।
वर्ष 2013 में कन्या प्राथमिक विद्यालय अमखेड़ा में उनकी पहली नियुक्ति हुई। उन्होंने विद्यालय को केवल नौकरी नहीं, बल्कि एक मिशन बनाया। संसाधनों की कमी के बावजूद उन्होंने पुराने विद्यार्थियों और समुदाय को विद्यालय से जोड़ा। पुरातन छात्र परिषद बनाकर विद्यालय के लिए सहयोग जुटाया। इससे ग्रामीण सरकारी विद्यालयों में मुश्किल लगने वाली सुविधाएं उपलब्ध हुईं।
आधुनिक शिक्षण संसाधनों का उपयोग
विद्यालय में अब स्मार्ट टीवी, लैपटॉप और टैबलेट जैसे डिजिटल शिक्षण संसाधन उपलब्ध हैं। प्रोजेक्टर और वीआर बॉक्स भी बच्चों की पढ़ाई में सहायक हैं। आरओ प्लांट और बेंच जैसी बुनियादी सुविधाएं भी जुटाई गई हैं। इन तकनीकों से बच्चे विषयों को केवल पढ़ते नहीं, बल्कि उन्हें देखकर और समझकर सीखते हैं। यह उन्हें सीखने का बेहतर अवसर प्रदान करता है।
बच्चों में पैदा कर रहे सीखने की ललक
विपिन का मानना है कि उनकी कोशिश बच्चों को केवल पाठ्यक्रम पूरा कराने तक सीमित रखने की नहीं है। वह चाहते हैं कि बच्चे सवाल पूछें और नई चीजें सीखें। बच्चों को अपनी रुचि पहचानने और भविष्य के लिए बड़े सपने देखने को प्रेरित किया जाता है। यह पहल बच्चों के सर्वांगीण विकास पर केंद्रित है। इससे उनकी उत्सुकता बढ़ती है और सीखने की ललक पैदा होती है।
राज्य स्तर पर मिला सम्मान
विद्यालय में किए गए शैक्षिक नवाचारों और प्रयासों को प्रदेश स्तर पर भी पहचान मिली। वर्ष 2021 में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने विपिन उपाध्याय को सम्मानित किया। उन्हें राज्य अध्यापक पुरस्कार से नवाजा गया। यह सम्मान उनके शैक्षिक नवाचारों और विद्यालय में किए गए प्रयासों की महत्वपूर्ण उपलब्धि है। यह उनके समर्पण और प्रयासों की सराहना का प्रतीक है।
