उरई। चिटफंड कंपनी के नाम पर लोगों से धोखाधड़ी करने के मामले में अदालत ने दो दोषियों को सात-सात वर्ष के कारावास की सजा सुनाई है। मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट अभिषेक खरे ने दोनों आरोपियों पर 7,500-7,500 रुपये का अर्थदंड भी लगाया है।
डकोर कोतवाली क्षेत्र के ग्राम टिमरो निवासी राजकुमारी ने 27 जून 2016 को पुलिस को तहरीर देकर बताया था कि वह स्टेशन रोड स्थित एक चिटफंड कंपनी में एजेंट के रूप में काम करती थीं। उनके माध्यम से क्षेत्र के कई लोगों ने कंपनी में रुपये जमा किए थे। निर्धारित अवधि पूरी होने के बाद जब निवेशकों ने रकम वापस मांगी तो उन्हें भुगतान नहीं किया गया। इसी बीच कंपनी के संचालक रुपये लेकर भाग गए।
मामले में पुलिस ने नई दिल्ली के द्वारका थाना क्षेत्र के सेवक पार्क निवासी रमनदीप उर्फ संदीप और सहारनपुर के ओल्ड माधव नगर निवासी करुणेश शर्मा के खिलाफ धोखाधड़ी और कूटरचित दस्तावेजों से संबंधित धाराओं में मुकदमा दर्ज किया था। विवेचना पूरी करने के बाद पुलिस ने आठ सितंबर 2017 को दोनों आरोपियों के खिलाफ न्यायालय में आरोप पत्र दाखिल किया।
मुकदमे की सुनवाई के दौरान वादी राजकुमारी समेत अन्य गवाहों के बयान दर्ज किए गए। अभियोजन की ओर से प्रस्तुत साक्ष्यों और गवाहों के बयानों के आधार पर दोनों पक्षों के अधिवक्ताओं ने अपनी-अपनी दलीलें रखीं।
सुनवाई पूरी होने के बाद न्यायालय ने उपलब्ध साक्ष्यों और गवाहों के बयानों के आधार पर रमनदीप उर्फ संदीप और करुणेश शर्मा को दोषी पाया। अदालत ने दोनों को सात-सात वर्ष के कारावास के साथ 7,500-7,500 रुपये के अर्थदंड की सजा सुनाई है।
