सिरसा कलार। हथना खुर्द के पास मलंगा नाले पर बना रपटा 20 अगस्त से पानी में डूबा हुआ है। करीब 15 दिन से रपटा के ऊपर पानी भरा होने से क्षेत्र के करीब 50 गांवों की आवाजाही प्रभावित है। सबसे ज्यादा असर स्कूल-कॉलेज जाने वाले बच्चों और बीमार मरीजों पर पड़ रहा है। ऊद गांव के मुख्य रास्ते पर पानी और कच्चे रास्ते पर कीचड़ होने से गांव से निकलने के दोनों रास्ते लगभग बंद हैं।

रपटा पर पानी होने के कारण हथना खुर्द, सदूपुरा, हथना बुजुर्ग समेत आसपास के कई गांवों के छात्र-छात्राएं करीब 15 दिन से सिरसा कलार स्थित स्कूल-कॉलेज नहीं पहुंच पा रहे हैं। छात्र अंकित, रश्मि, मनोज और साक्षी ने बताया कि रपटा पर लगातार पानी भरा होने के कारण उसे पार करने में डर लगता है। कई बार स्कूल-कॉलेज जाने का प्रयास किया, लेकिन पानी का बहाव देखकर लौटना पड़ा। सदूपुरा होकर करीब 15 किलोमीटर का अतिरिक्त चक्कर लगाकर स्कूल-कॉलेज जाना भी हर दिन संभव नहीं है। इससे उनकी पढ़ाई लगातार पीछे छूट रही है और परीक्षा की तैयारी भी प्रभावित हो रही है।

छात्रों ने कहा कि 15 दिन से एक दिन भी ऐसा नहीं हुआ, जब रपटा पूरी तरह खाली मिला हो। साइकिल से दूसरे रास्ते से जाने पर काफी समय और मेहनत लगती है। एक-दो बार जाने के बाद इतनी थकावट हो जाती है कि दोबारा जाने की हिम्मत नहीं होती। छात्रों का कहना है कि यदि जल्द रास्ता नहीं खुला तो कोर्स पूरा करना और परीक्षा की तैयारी करना मुश्किल हो जाएगा।

ऊद गांव में दो हजार की आबादी, दोनों रास्ते बंद

ऊद गांव में करीब दो हजार की आबादी रहती है। गांव के सामने मुख्य रास्ते पर मलंगा नाले का रपटा है, जबकि दूसरा रास्ता कच्चा है। बारिश के कारण रपटा पर पानी और कच्चे रास्ते पर कीचड़ होने से ग्रामीणों के सामने गांव से बाहर निकलने का संकट खड़ा हो गया है। ग्रामीणों का कहना है कि रपटा पर इस बार चौथी बार पानी भर चुका है और करीब 15 दिन से गांव की स्थिति खराब बनी हुई है। कॉलेज जाने वाले छात्र आशीष, सोनिया और हर्षित ने बताया कि दोनों रास्तों की हालत खराब होने से वे नियमित रूप से कॉलेज नहीं जा पा रहे हैं। पढ़ाई पूरी तरह प्रभावित हो गई है। कोर्स लगातार पीछे छूटता जा रहा है। परीक्षा नजदीक आने के साथ चिंता भी बढ़ रही है कि समय रहते पाठ्यक्रम कैसे पूरा होगा।

बीमार को अस्पताल ले जाना भी बना चुनौती

रास्ता बंद होने का असर स्वास्थ्य सेवाओं पर भी पड़ रहा है। ग्रामीण मनीष, उपेंद्र और राजू सिंह ने बताया कि दो दिन से परिवार के शीतल सिंह बीमार हैं। उनकी हालत में सुधार के लिए अस्पताल ले जाने की जरूरत है, लेकिन गांव से बाहर निकलने का रास्ता ही नहीं है। ऐसे में परिजनों को चिंता सता रही है कि जरूरत पड़ने पर मरीज को तत्काल अस्पताल कैसे पहुंचाया जाएगा। ग्रामीणों के मुताबिक, बारिश की वजह से डॉक्टर भी आसानी से गांव तक नहीं पहुंच पा रहे हैं। गंभीर मरीज होने की स्थिति में समस्या और बढ़ सकती है। ग्रामीणों का कहना है कि सड़क संपर्क बाधित होने से स्वास्थ्य सेवाएं भी प्रभावित हो रही हैं।

बाजार जाने वाले छोटे दुकानदार भी प्रभावित

रास्ता बंद होने से ऊद गांव के छोटे दुकानदारों और रोजाना बाजार जाने वाले लोगों का काम भी प्रभावित हुआ है। ग्रामीण सिरसा कलार और नियामतपुर बाजार में छोटी दुकानें लगाकर परिवार का भरण-पोषण करते हैं, लेकिन गांव से बाहर निकलना मुश्किल होने के कारण कई दिनों से उनका कारोबार प्रभावित है। ग्रामीणों का कहना है कि एक तरफ बच्चों की पढ़ाई रुक गई है तो दूसरी तरफ मरीजों को अस्पताल पहुंचाना मुश्किल है। साथ ही रोज कमाकर खाने वाले लोगों की आमदनी भी बंद हो गई है।

15 दिन से स्कूल नहीं जा पा रहे

फोटो- 14 अंकित।

15 दिन से स्कूल नहीं जा पा रहे हैं। रपटा पर पानी देखकर निकलने में डर लगता है। दूसरे रास्ते से जाने पर करीब 15 किलोमीटर का चक्कर पड़ता है। इससे पढ़ाई बहुत पीछे छूट गई है और परीक्षा की तैयारी भी प्रभावित हो रही है। -अंकित, छात्र

बीमार परिजन को नहीं ले पा रहे

फोटो- 15 उपेंद्र।

परिवार में लोग बीमार हैं। रास्ता बंद होने की वजह से उन्हें समय पर इलाज के लिए ले जाना मुश्किल हो गया है। गांव से निकलने का रास्ता ही नहीं बचा है। -उपेंद्र, ऊद

अब परीक्षा की तैयारी की भी चिंता

फोटो- 16 नागेश।

रपटा पर पानी होने के कारण रास्ता बंद है और दूसरे रास्ते से जाने में काफी लंबा चक्कर पड़ता है। पढ़ाई छूटने के साथ अब परीक्षा की तैयारी की भी चिंता सताने लगी है। -नागेश, छात्र

समय पर इलाज न मिलने का डर

फोटो- 17 सीपू सेंगर।

गांव में किसी की तबीयत अचानक बिगड़ जाए तो सबसे बड़ी चिंता उसे अस्पताल पहुंचाने की होती है। रपटा पर पानी और कच्चे रास्ते में कीचड़ के कारण मरीज को बाहर ले जाना मुश्किल है। समय पर इलाज न मिलने से अनहोनी का डर बना रहता है। -सीपू सेंगर, स्थानीय

वर्जन

ऊद गांव से अतर्छला तक रास्ते का निर्माण बरसात बाद शुरू कराया जाएगा। ऊद व हथना खुर्द पर बने रपटा पर पुल के लिए भी प्रयास किया जा रहा है। -जितेंद्र कुमार, सहायक अभियंता, पीडब्ल्यूडी

फोटो- 12हथना खुर्द के रपटा पर चौथी बार चढ़ा पानी। संवाद

फोटो- 12हथना खुर्द के रपटा पर चौथी बार चढ़ा पानी। संवाद



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