झांसी। अगर किसी मरीज में स्वाइन फ्लू के लक्षण हैं, लेकिन वह शासन की गाइडलाइन के मानकों पर खरा नहीं उतरता है, तो उसकी जांच नहीं कराई जाएगी। दरअसल, बुंदेलखंड विश्वविद्यालय (बीयू) के छात्र में स्वाइन फ्लू के लक्षण दिखने पर डॉक्टरों ने सैंपल लेकर जांच करा दी। जांच में छात्र स्वाइन फ्लू पीड़ित निकला।

अब महारानी लक्ष्मीबाई मेडिकल कॉलेज प्रशासन जांच कराने के तरीके को गलत मान रहा है। साथ ही आदेश दे दिए हैं कि शासन से तय मानक पूरे नहीं होने तक किसी का भी नमूना जांच के लिए नहीं लिया जाएगा।

मेडिकल कॉलेज सूत्रों के अनुसार, दो सितंबर को मेडिसिन की ओपीडी में शिवाजी नगर में रह रहा बीयू का छात्र पहुंचा। उसने खांसी-जुकाम, बुखार व गले में दर्द की शिकायत की। डॉक्टर ने युवक को स्वाइन फ्लू की जांच के लिए भेज दिया। युवक ने माइक्रोबायलॉजी विभाग में पहुंचकर नमूना दिया और दवा लेकर चला गया। दूसरे दिन तीन सितंबर को स्वाइन फ्लू की पुष्टि होने से हड़कंप मच गया।

विशेषज्ञ के सलाह के बिना जांच के लिए नहीं लिख सकेंगे जूनियर डॉक्टर

स्वाइन फ्लू की पुष्टि होने पर सीएमओ डॉ. शिशिर पुरी ने तत्काल एक टीम भेजी। टीम ने युवक को दवाएं दीं और एकांतवास में रहने के लिए कहा। मुख्यालय को इसकी रिपोर्ट भेजी गई, तो मामला फंस गया। इसकी वजह यह रही कि युवक की स्थिति शासन द्वारा तय मानकों को पूरा नहीं कर रही थी। इस पर सीएमओ डॉ. शिशिर पुरी ने मेडिकल कॉलेज को एक पत्र भेजा। मामला फंसता देख कॉलेज प्रशासन ने अपनी गलती स्वीकार कर ली। इसके साथ ही, शासन के दिशा-निर्देश जारी करते हुए सख्ती से पालन के लिए कहा है। इसमें कहा गया है कि बिना विशेषज्ञ चिकित्सक से मशविरा किए कोई भी जूनियर रेजिडेंट अथवा सीनियर रेजिडेंट स्वाइन फ्लू की जांच नहीं लिखेगा।

मानक पूरे करने होंगे : प्राचार्य

प्राचार्य डॉ. सुधीर कुमार ने बताया आदेश कर दिया है कि शासन से तय मानक पूरे नहीं होने तक नमूना स्वाइन फ्लू की जांच के लिए नहीं भेजा जाएगा।

इन मानकों को पूरा करने पर होगी जांच

ए श्रेणी : हल्के लक्षण पर घर पर आराम करने और परिवार के सदस्यों से दूरी बनाए रखने की सलाह है। इनका 24 से 48 घंटे में चिकित्सकीय निगरानी में पुनर्मूल्यांकन होगा।

बी श्रेणी : तेज बुखार व गले में खराश, गर्भवती महिला, 65 वर्ष से अधिक उम्र के लोग, फेफड़े, हृदय, यकृत, गुर्दे की बीमारी, मधुमेह, कैंसर आदि से पीड़ित होंगे। इन रोगियों को अलग रखकर दवा दी जाएगी।

सी श्रेणी : अति गंभीर मामलों में सांस फूलना, सीने में दर्द, अधिक नींद या बेहोशी, बीपी कम होना, खून वाला बलगम, नाखून नीले पड़ना आदि है। ऐसे मरीजों को तत्काल भर्ती कर उपचार दिया जाएगा। इन रोगियों की स्वाइन फ्लू की जांच होगी।

अब तक 14 की जांच हुईं, एक मिला पॉजिटिव

सीएमओ डॉ. शिशिर पुरी ने बताया कि जिले में स्वाइन फ्लू नियंत्रण में है। शनिवार तक जिले में 14 संदिग्ध मरीजों की जांच कराई गई। इनमें झांसी के 10, ललितपुर के दो, जालौन व दतिया के एक-एक रोगी हैं। सिर्फ एक रोगी की रिपोर्ट पॉजिटिव आई है।

बुखार के 83 रोगी में से 45 में आईएलआई

मेडिकल कॉलेज में मेडिसिन की ओपीडी में शनिवार को बुखार के 83 रोगी उपचार के लिए आए। इनमें में इनफ्लूएंजा-ए (आईएलआई) के 45 रोगी रहे। इन रोगियों को उपचार के साथ घर में एकांतवास में रहने की सलाह दी गई। यह जानकारी नोडल अधिकारी डॉ. खुश्तर हैदर ने दी है।

स्वाइन फ्लू के लक्षण

-तेज बुखार व ठंड लगना

-खांसी और गले में खराश

-बुखार के साथ आंखें लाल होना

-मांसपेशियों और सिर में दर्द

-अत्यधिक थकान व कमजोरी

-बच्चों में पेट से जुड़ी समस्याएं, उल्टी या दस्त

-जब लक्षण गंभीर हो तो सांस का फूलना

ऐसे फैलता है संक्रमण

-खांसने-छींकने से हवा में फैली ड्रॉप्स से

-संक्रमित सतह जैसे हैंडल या फोन को छूने से

-संक्रमित के चेहरे, आंख या नाक को छूने से

ऐसे करें बचाव

-भीड़भाड़ में जाने से बचें

-संक्रमित से दूरी बनाएं

-खांसने और छींकने पर रुमाल लगाएं

-हाथ मिलाने से परहेज करें

-बार-बार हाथ धोते रहें

-भीड़भाड़ की जगह पर मास्क लगाएं



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