नगर निगम कार्यकारिणी चुनाव में जिनकी वजह से भाजपा के एक प्रत्याशी को शिकस्त मिली, ऐसे सात नाम जांच में उजागर हो गए हैं। इनमें बगावत कर चुनाव लड़ने वालीं पार्षद से लेकर उनके प्रस्तावक तक के नाम शामिल हैं। समिति ने इनके खिलाफ कार्रवाई की सिफारिश की है।

बीते 10 सितंबर को हुए नगर निगम के कार्यकारिणी चुनाव में बगावत और क्रॉस वोटिंग भाजपा को भारी पड़ी थी। पार्टी की बागी नीता यादव ने नामांकन कर दिया था। पार्टी की ही पार्षद ममता पाल उनकी प्रस्तावक बन गईं। ऐसे में मतदान से चुनाव की नौबत आ गई। विपक्ष ने नीता को समर्थन देने का एलान कर दिया गया। दूसरी तरफ, भाजपा के कुछ पार्षदों ने भितरघात करते हुए क्रॉस वोटिंग कर दी। इससे भाजपा की ओर से घोषित प्रत्याशी रितिका तिवारी चुनाव हार गईं। जबकि नीता यादव चुनाव जीतकर कार्यकारिणी सदस्य बन गईं। इस हार से सत्ताधारी पार्टी भाजपा को करारा झटका लगा। खासकर संगठन के एक पदाधिकारी की खूब किरकिरी हुई। दूसरी तरफ, हार से नाराज रितिका तिवारी ने शनिवार को मेयर कक्ष में भाजपा के ही एक जनप्रतिनिधि के खिलाफ मोर्चा खोल दिया। उन पर बागी प्रत्याशी को न मनाने का दोष मढ़ दिया। एक अन्य प्रत्याशी पर वोट ट्रांसफर करने का आरोप लगाया।

वहीं, शनिवार को ही भाजपा की ओर से मामले की जांच के लिए दो सदस्यीय समिति गठित कर दी गई। जांच का जिम्मा बीजेपी पार्षद दल के नेता नरेंद्र नामदेव और निगम में भाजपा के सचेतक मुकेश सोनी बंटी को सौंपा गया। तीन दिन में जांच पूरी करने के लिए कहा गया। मंगलवार को समिति ने अपनी रिपोर्ट महानगर अध्यक्ष को सौंप दी। सूत्रों के मुताबिक समिति ने बागी प्रत्याशी, उनकी प्रस्तावक समेत सात पार्षदों के नाम उजागर किए हैं। इसमें पांच पार्षदों पर तय पार्टी प्रत्याशी को वोट नहीं देने का आरोप है। समिति ने बागियों से लेकर भीतरघातियों के खिलाफ कार्रवाई करने की सिफारिश की है। अब जल्द ही कुछ पार्षदों के खिलाफ कार्रवाई हो सकती है।

संगठन की ओर से तीन दिन में जांच करने के निर्देश दिए गए थे। मंगलवार को महानगर अध्यक्ष को जांच रिपोर्ट सौंप दी गई है। – मुकेश सोनी, जांच समिति सदस्य/सचेतक, भाजपा।



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