झांसी। फर्जी मेडिकल सर्टिफिकेट बनाने के मामले में तीन सदस्यीय जांच टीम ने दोनों चिकित्सकों को क्लीन चिट दी है। जांच में सामने आया है कि फर्जी सर्टिफिकेट पर लगी मुहर और हस्ताक्षर दोनों चिकित्सकों के नहीं हैं। यानी कोई तीसरा व्यक्ति उनके नाम और फर्जी मुहर का इस्तेमाल कर मेडिकल सर्टिफिकेट तैयार कर रहा था। जांच टीम ने असली आरोपी का पता लगाने के लिए मामले की पुलिस से जांच कराने और दोषी के खिलाफ कार्रवाई की संस्तुति की है।
जिला अस्पताल के रक्त केंद्र प्रभारी डॉ. सुशील कुमार गुप्ता ने आईजी, मंडलायुक्त, डीएम और एसएसपी से शिकायत की थी। उन्होंने आरोप लगाया था कि उनके नाम से फर्जी मेडिकल सर्टिफिकेट बनाए जा रहे हैं और उनकी फर्जी मुहर का भी इस्तेमाल किया जा रहा है। शिकायत में उन्होंने पुलिस लाइन अस्पताल में मेडिकल ऑफिसर डॉ. सूर्यकांत गुप्ता पर फर्जी सर्टिफिकेट बनाने का आरोप लगाया था।
मामले की गंभीरता को देखते हुए एडी हेल्थ डॉ. एसके सोनी ने सीएमओ डॉ. शिशिर पुरी को जांच के आदेश दिए। सीएमओ ने डिप्टी एसीएमओ डॉ. रविशंकर के नेतृत्व में तीन सदस्यीय जांच टीम गठित की। टीम में डॉ. आरएस भदौरिया और डॉ. नितिन कंसौलिया भी शामिल रहे।
मुहर और हस्ताक्षर का कराया मिलान
जांच टीम ने फर्जी बताए जा रहे मेडिकल सर्टिफिकेटों पर लगी मुहर और हस्ताक्षर का दोनों चिकित्सकों की वास्तविक मुहर, हस्ताक्षर और राइटिंग से मिलान कराया। जांच टीम के मुताबिक फर्जी सर्टिफिकेटों पर लगे हस्ताक्षर और मुहर दोनों चिकित्सकों के वास्तविक हस्ताक्षर और मुहर से मेल नहीं खाए। जांच के बाद टीम इस निष्कर्ष पर पहुंची कि फर्जी मेडिकल सर्टिफिकेट दोनों चिकित्सकों ने नहीं बनाए हैं। उनके नाम और मुहर का इस्तेमाल किसी तीसरे व्यक्ति ने किया है। हालांकि जांच रिपोर्ट में उस व्यक्ति की पहचान नहीं हो सकी है।
विभाग की प्रक्रिया की जानकारी रखने वाले पर शक
जांच टीम ने आशंका जताई है कि फर्जी मेडिकल सर्टिफिकेट तैयार करने वाले व्यक्ति को मेडिकल सर्टिफिकेट जारी करने की प्रक्रिया की जानकारी है। इससे यह भी आशंका जताई गई है कि फर्जीवाड़े में स्वास्थ्य विभाग से जुड़ा कोई जानकार व्यक्ति शामिल हो सकता है। हालांकि किसी व्यक्ति को आरोपी के रूप में चिह्नित नहीं किया गया है और इसकी पुष्टि पुलिस जांच के बाद ही होगी।
उच्चाधिकारियों को भेजी रिपोर्ट
जांच टीम के नोडल अधिकारी डॉ. रविशंकर ने बताया कि जांच रिपोर्ट मंडलायुक्त, आईजी, डीएम और एसएसपी को अग्रिम कार्रवाई के लिए भेज दी गई है। फर्जी मेडिकल सर्टिफिकेट बनाने वाले व्यक्ति का पता लगाने और मामले में आगे की कार्रवाई के लिए पुलिस जांच की संस्तुति की गई है।
फर्जी मेडिकल सर्टिफिकेट के मामले में जांच रिपोर्ट प्राप्त हो गई है। रिपोर्ट उच्चाधिकारियों को अग्रिम कार्रवाई के लिए भेज दी गई है। – डॉ. शिशिर पुरी, सीएमओ
