झांसी। शहर में बढ़ते प्रदूषण के बीच रेलवे ने अपनी जमीन पर हरियाली की नई तस्वीर तैयार की है। मंडल रेल प्रशासन ने 3.39 हेक्टेयर भूमि में 1.15 लाख पौधे रोपे हैं। यह सघन वन मियावाकी पद्धति से विकसित किया जा रहा है। इसमें 35 देसी, औषधीय और पर्यावरणीय महत्व वाली प्रजातियां शामिल हैं।
मंडल रेलवे और वन विभाग के बीच 28 जनवरी को समझौता ज्ञापन हुआ था। इसके बाद इस दिशा में काम शुरू किया गया। आरपीएफ टीए कैंप में 1.30 हेक्टेयर में 32 हजार पौधे लगाए गए। इलेक्ट्रिक लोको शेड के पास 2.09 हेक्टेयर में 83 हजार पौधे रोपे गए हैं। मुख्य जनसंपर्क अधिकारी डॉ. शिवम शर्मा ने यह जानकारी दी। वन विभाग आगामी चार वर्षों तक इन पौधों का संरक्षण और रखरखाव करेगा।
स्टेशन से कॉलोनी तक हरियाली बढ़ाने की तैयारी
मियावाकी पद्धति में पौधों को सामान्य पौधरोपण की तुलना में कम दूरी पर लगाया जाता है। एक वर्ग मीटर में करीब तीन से पांच पौधे लगाए जाते हैं। पौधरोपण से पहले मिट्टी को पौधों के अनुकूल तैयार किया जाता है। शुरुआती वर्षों में नियमित देखभाल से पौधे तेजी से बढ़कर घना वन क्षेत्र बनाते हैं। इस पहल का उद्देश्य धूल प्रदूषण घटाने के साथ जैव विविधता को सहारा देना है। रेलवे झांसी मंडल के अन्य उपयुक्त स्थलों पर भी ऐसे सघन वन विकसित करने की योजना बना रहा है।
मियावाकी पद्धति से हरित क्षेत्र एक नजर में
कुल भूमि: 3.39 हेक्टेयर
कुल पौधे: 1.15 लाख
आरपीएफ टीए कैंप: 1.30 हेक्टेयर, 32 हजार पौधे
इलेक्ट्रिक लोको शेड के पास: 2.09 हेक्टेयर, 83 हजार पौधे
प्रजातियां: 35 देशी, औषधीय एवं पर्यावरणीय महत्व की
देखभाल: वन विभाग, चार वर्ष
एमओयू: 28 जनवरी 2026
