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श्रद्धा की मदद आखिर कौन कर रहा है?
– फोटो : अमर उजाला।
विस्तार
फरारी के दौरान श्रद्धा ने अपने करीबियों से संपर्क किया। अधिकतर वो लोग शामिल रहे, जो अक्सर उसके साथ उठते-बैठते थे। वहीं एक पूर्व डीजी का बेटा भी श्रद्धा के संपर्क में रहकर बातचीत कर रहा था। इसकी पुख्ता जानकारी मिली है। जो भी बातचीत हुई, वह फेसटाइम व व्हाट्सएप के जरिये ही की गई। दूसरी तरफ श्रद्धा की गिरफ्तारी के बाद से खाकी और खादी वालों के अलावा कई अफसरान की भी जान सांसत में है कि कहीं उनका कनेक्शन उजागर न हो जाए।
दरअसल, वारदात के बाद जब कुछ बड़े लोगों का कनेक्शन श्रद्धा से सामने आया था तो हड़कंप मच गया था। सोशल मीडिया पर ये तक चर्चा थी कि तस्वीरें भी हैं, जिनसे बड़ों-बड़ों की कुर्सियां हिल सकती हैं। इसलिए कमिश्नरेट के अधिकारी भी हैरान-परेशान थे। तभी एक के बाद एक कॉल रिकॉर्डिंग सामने आने लगीं, जिनमें श्रद्धा की जुबान से सर का जिक्र चर्चा का विषय बन गया था। अब जब श्रद्धा पकड़ी जा चुकी है और मोबाइल पुलिस के कब्जे में है तो उससे संपर्क में रहने वाले तनाव में आ गए हैं। इसलिए श्रद्धा को नागपुर से लखनऊ लाने वाली टीम को विशेष एहतियात बरतने के निर्देश हैं।
मैनेज कराई गई बाइट….पीछे कौन
जिस तरह से श्रद्धा लखनऊ आई और न्यूज एजेंसी को बाइट देकर फिर चली गई थी, ये उसके खुद के वश की बात नहीं है। सूत्रों के मुताबिक, बाइट मैनेज कराने वाला बड़ा शख्स है। इसमें कई लोगों का दिमाग रहा। बाइट का सुबह होना और शाम को उसका रिलीज करना, सब कुछ प्लान से किया गया। सूत्र बताते हैं कि श्रद्धा से जुड़े पावरफुल लोग सीधे बातचीत नहीं कर रहे थे। एक-दो लोग उसके करीबियों से बात करके आगे का प्लान बता रहे थे। चूंकि मामला हाईप्रोफाइल है, लिहाजा मामले से जुड़े इस तरह के तथ्य सामने आना बेहद मुश्किल है।
इसलिए शातिर हो गई श्रद्धा..
श्रद्धा का साथ गैंगस्टरों से रहा। पुलिस के कई अधिकारी भी संपर्क में रहे। वहीं नेताओं की भी करीबी रही। इसलिए उसके भीतर शातिरपन भर गया। फरारी के दौरान वह ऐसे सतर्क रह रही थी, जैसे कोई बड़ा अपराधी हो। मोबाइल न रखना, दूसरे का वाईफाई इस्तेमाल करना, एक जगह पर अधिक देर न ठहरना आदि। इससे उसके शातिरपन का अंदाजा लगाया जा सकता है। बाकी का काम पर्दे के पीछे वाले कर रहे थे।
