झांसी। मेडिकल कॉलेज प्रशासन अब मेडिकल सप्लाई कॉरपोरेशन से जीवन रक्षक दवाओं (ईडीएल) के आने का इंतजार नहीं करेगा। जैसे ही डिमांड लंबित होगी वैसे ही ई-टेंडर से दवा खरीद ली जाएगी।
मेडिकल कॉलेज शासन से मिलने वाले बजट से 70 फीसदी दवाएं उप्र. मेडिकल सप्लाई कॉरपोरेशन से खरीदता है। कॉरपोरेशन के पास स्टॉक नहीं होने की वजह से कई माह तक तक दवा की आपूर्ति नहीं होती है। जीवनरक्षक दवाओं की आपूर्ति भी बाधित होती है, जिसकी वजह से रोगियों के उपचार करने में काफी दिक्कत होती है।
वहीं, डॉक्टरों को मजबूरन बाहर की दवा लिखनी पड़ती है। कॉलेज प्रशासन को आए दिन समुचित दवाएं नहीं मिलने की शिकायत मिलती हैं। इसके चलते कॉलेज प्राचार्य डॉ. सुधीर कुमार ने शनिवार को नेत्र रोग विभागाध्यक्ष डाॅ. जितेंद्र कुमार, डॉ. खुश्तर हैदर, चीफ फार्मासिस्ट आदि के साथ जीवन रक्षक दवाओं की समुचित आपूर्ति पर मंथन किया।
चीफ फार्मासिस्ट ने बताया कि मेडिकल कॉलेज की सूची के अनुसार 403 जीवनरक्षक दवाएं होना जरूरी है। इनमें से अधिकांश की आपूर्ति काफी समय से नहीं हो रही है। इस पर तय हुआ कि फिलहाल कॉलेज प्रशासन 30 फीसदी बजट की राशि से ई-टेंडर के माध्यम से जीवन रक्षक दवाएं खरीदेगा मगर तीन माह के जरूरत के हिसाब से। इस फैसले से मेडिकल कॉलेज में उपचार के लिए आने वाले गंभीर रोगियों को राहत मिलेगी।
प्राचार्य डॉ. सुधीर कुमार ने बताया कॉरपोरेशन से नहीं मिलने वाली जीवन रक्षक दवाएं अब ई-टेंडर के माध्यम से खरीदी जाएंगी। इससे रोगियों के लिए परिजनों को बाहर से दवा नहीं खरीदनी होगी।
