उरई। हादसे से घटनास्थल पर बच्चों की चीख-पुकार से ग्रामीणों में खलबली मच गई। लोगों ने किसी तरह सभी बच्चों को पलटे वाहन ने बाहर निकाला। बच्चे बस रो-रोकर मम्मी पापा कहकर चिल्लाए जा रहे थे। लोगों ने किसी तरह उन्हें समझाकर अपने निजी वाहनों से सीएचसी पहुंचाया। जब हादसे की जानकारी परिजनों को हुई तो घरों में भी चीख-पुकार मच गई। हादसे की जानकारी के बाद अभिभावक जिस स्थिति में थे वैसे ही अस्पताल के लिए चल दिए। जब अभिभावक अस्पताल पहुंचे तो बच्चे सहमे से बिस्तर पर लेटे थे और मौजूद डॉक्टर उनका इलाज कर रहे थे।

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डॉक्टर उनसे बात करन डर खत्म करने की कोशिश कर रहे थे, लेकिन घटना से सहमे बच्चे बस रोये ही जा रहे थे। जैसे ही बच्चों की नजर परिजनों पर पड़ी तो वह माता-पिता से लिपट कर जोर-जोर से रोने लगे। जिस पर अपने बच्चों के शरीर पर चोटों के निशान देखकर वह भी रोने लगे। किसी तरह बच्चों को समझाकर शांत कराया गया। लेकिन वह हादसे से डरे सहमे दिखाई दे रहे थे। 16 बच्चों को सीएचसी से ही उपचार के बाद छुट्टी दे दी गई। दस बच्चों का मेडिकल में इलाज चल रहा है। सभी की हालत ठीक है।

डरे सहमे बच्चों ने बताया कि जब बड़ागांव से अन्य बच्चों को लेकर क्रूजर गाड़ी कदौरा की तरफ जा रही थी,तभी एक बच्चे को चालक बिस्कुट खिलाने और मजाक करने लगा,तभी उस बच्चे ने गाड़ी की स्टीयरिंग घुमा दी और गाड़ी के सामने एक पत्थर आ गया। जिससे बचाने के चक्कर में गाड़ी खंदक में चली गई। घटना के बाद मौके पर शिक्षा विभाग का कोई अधिकारी और कर्मचारी नहीं पहुंचा। एबीएसए ज्ञान प्रकाश का कहना है कि बच्चों को ज्यादा चोट नहीं आई है, जब उन्हें घटना की पूरी जानकारी दी तो वह अपनी बात से पलट गए।

बिना बीमा व प्रदूषण के वाहन को महीनों से दौड़ा रहा था चालक

उरई। कदौरा स्थित डैफोडिल इंग्लिश मीडियम स्कूल की गाड़ी का बीमा चार महीने पहले खत्म हो गया था। लेकिन इसके बाद भी स्कूल प्रबंधन ने ध्यान नहीं दिया। गुरुवार को वाहन से हादसा होने के बाद स्कूल प्रबंधन के हाथ पांव फूल गए। लेकिन सवाल यह उठता है कि इतने दिन होने के बाद भी वाहन सड़क पर दौड़ता रहा और एआरटीओ की नजर उस वाहन पर नहीं पड़ी। लोगों का कहना है कि स्कूल प्रबंधन को भी इस तरह से वाहन को नहीं चलाना चाहिए था। हादसे से लोगों में अब अपने बच्चों को लेकर खौफ दिखाई दे रहा है। एआरटीओ राजेश कुमार वर्मा ने बताया कि गाड़ी स्कूल के नाम है, डैफोडिल इंग्लिश मीडियम स्कूल कदौरा के प्रबंधक मोहम्मद इरफान हैं।

सिर्फ रात में सक्रिय रहता है एआरटीओ विभाग

उरई। शासन स्तर से स्कूली वाहनों पर सुरक्षा के मानकों को लेकर सख्त नियम लागू हैं, इसके बावजूद भी जालौन का एआरटीओ विभाग स्कूली वाहनों में कैद मासूम का सुरक्षा के प्रति संजीदा नहीं है। स्कूली वाहन के खाई में गिर जाने की घटना से लोगों में एआरटीओ विभाग के प्रति खासा रोष है। लोगों का कहना है कि विभागीय अधिकारियों को केवल रात में हाईवे पर खड़े होकर ट्रकों को चेक करना याद रहता है।विभाग के जिम्मेदार स्कूली वाहनों की मनमानी पर अंकुश लगाने में अबतक नाकाम साबित हुए है ।

एसपी के आदेश पर चला चेकिंग अभियानॉ, 28 पर हुई कार्रवाई

उरई। बच्चों को स्कूल लाते समय वाहन के खंदक में चले जाने की जानकारी से प्रशासन पूरे दिन परेशान रहा। जानकारी पर एसपी डॉ. दुर्गेश कुमार ने जिले के सभी थानों को निर्देश दिए कि जिले के सभी स्कूली वाहनों को चैक किया जाए। जिस पर दोपहर में चेकिंग अभियान चलाया गया। जिले भर में चले चेकिंग अभियान में 138 स्कूली वाहनों को चैक किया गया। जिसमें 28 पर कार्रवाई की गई है। एसपी ने बताया कि समय समय पर जिले भर में वाहनों पर कार्रवाई की जाती है। अब लगातार वाहनों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।

छह बच्चों को आगे बैठाया था चालक

कदौरा।

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पंखा गिरने से दो छात्राएं घायल

कदौरा। कस्बा स्थित एक प्राइवेट विद्यालय में शुक्रवार को शिक्षण कार्य के दौरान छात्राओं के ऊपर पंखा गिर गया, जिससे दो छात्राएं गंभीर रूप से घायल हो गईं

शुक्रवार को कस्बा स्थित एक प्राइवेट विद्यालय में छात्र एवं छात्राओं की क्लास चल रही थी, तभी सीलिंग फैन अचानक गिर गया। इससे नीचे बैठी छात्रा जैनब (12) व अलिया (11) निवासी कदौरा घायल हो गईं। यह देख कर अन्य बच्चों में चीख पुकार मच गई। घायल छात्राओं को स्कूल के शिक्षक तुरंत सीएचसी में ला। ,घटना की जानकारी जब परिजनों को लगी तो वह सीएचसी के लिए दौड़े। परिजनों ने स्कूल स्टॉफ को खरी खोटी सुनाई। घायल छात्राओं को प्राथमिक उपचार के बाद छुट्टी दे दी गई। एबीएसए ज्ञान प्रकाश अवस्थी ने कहा कि मामला संज्ञान में नहीं है। मामले की जानकारी कर विद्यालय का निरीक्षण कर रिपोर्ट बीएसए को सौपेगें। (संवाद)



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