झांसी। डाक विभाग में फर्जी खाते खोलकर सरकारी धन की हेराफेरी के मामले में पूर्व डाक सहायक अरविंद पटेल से सरकारी बकाये की वसूली की प्रक्रिया शुरू हो गई है। जांच रिपोर्ट में उसे मुख्य अपराधी बताया गया है। इस संबंध में डाक विभाग ने 64,09,683 रुपये की वसूली के लिए प्रशासन को पत्र भेजा था।
इस पर अपर जिलाधिकारी वित्त एवं राजस्व पल्लवी मिश्रा ने डाक विभाग से निर्धारित प्रारूप में तीन प्रतियों में वसूली प्रमाणपत्र मांगा है। साथ ही अरविंद पटेल की चल-अचल संपत्तियों का ब्योरा भी उपलब्ध कराने को कहा है।
एडीएम ने डाक विभाग का पत्र कुछ औपचारिकताएं पूरी न होने के कारण वापस कर दिया है। उन्होंने सक्षम अधिकारी की ओर से जारी वसूली प्रमाणपत्र में संबंधित व्यक्ति का पूरा नाम, पिता का नाम और पता दर्ज करने के निर्देश दिए हैं। प्रवर डाक अधीक्षक वरुण मिश्रा ने बताया कि मांगे गए दस्तावेज जल्द प्रशासन को उपलब्ध करा दिए जाएंगे।
फर्जी खाते खोलकर निकाले गए थे 64 लाख रुपये, सीबीआई ने दर्ज किया था मामला
डाक विभाग में सरकारी धन की हेराफेरी का यह मामला वर्ष 2016-17 का है। झांसी प्रधान डाकघर और इससे जुड़े उपडाकघरों में फर्जी बचत खाते खोलकर उनमें डाक विभाग के चेकों के माध्यम से रकम निकालने का आरोप है। विभागीय शिकायत के अनुसार, आरोपियों ने जाली दस्तावेजों के आधार पर काल्पनिक खाते खोले और उनमें कम रकम जमा कराकर चेकों के जरिये बड़ी धनराशि निकाल ली। इससे विभाग को करीब 64 लाख रुपये का नुकसान हुआ।
इस मामले में डाक विभाग की ओर से 25 जुलाई 2022 को सीबीआई की लखनऊ स्थित भ्रष्टाचार निरोधक शाखा को शिकायत भेजी गई थी। जांच के बाद सीबीआई ने एक जून 2023 को प्राथमिकी दर्ज की थी। एफआईआर में कुल 14 लोगों को नामजद किया गया। इनमें डाक विभाग के छह तत्कालीन अधिकारी-कर्मचारी और आठ निजी व्यक्ति शामिल हैं।
इन्हें किया गया था नामजद
एफआईआर में तत्कालीन वरिष्ठ डाकपाल ऐबरन सिंह, डाक सहायक अशोक कुमार, उपडाकपाल हरदास वर्मा, डाक सहायक अरविंद पटेल, तत्कालीन उप डाकपाल एके शांडिल्य और कार्यवाहक वरिष्ठ डाकपाल राशिद खान मंसूरी के नाम शामिल थे। इनके अलावा आठ निजी व्यक्तियों को भी आरोपी बनाया गया था। हालांकि मामले में आरोपों की पूरी जांच रिपोर्ट अभी सामने नहीं आई है।
सीबीआई ने इन सभी पर आपराधिक साजिश, सरकारी धन के गबन, धोखाधड़ी और जाली दस्तावेजों के इस्तेमाल सहित भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की धाराओं में मामला दर्ज किया था। विभागीय शिकायत में अलग-अलग खातों में जमा रकम की तुलना में कई गुना अधिक निकासी का उल्लेख किया गया था।
