चिरगांव। रबी की बोआई के लिए किसानों को खाद की आवश्यकता है। किसान लगातार पी सी एफ और सहकारी समिति के चक्कर लगा रहे हैं। उनका कहना है कि उन्हें डीएपी खाद के साथ एनपीके खाद भी दी जा रही है, जिसे वे लेना नहीं चाहते।
खबर वही जो सत्य हो
चिरगांव। रबी की बोआई के लिए किसानों को खाद की आवश्यकता है। किसान लगातार पी सी एफ और सहकारी समिति के चक्कर लगा रहे हैं। उनका कहना है कि उन्हें डीएपी खाद के साथ एनपीके खाद भी दी जा रही है, जिसे वे लेना नहीं चाहते।
बुधवार को पी सी एफ केंद्र पर एक किसान ने दो बोरी एनपीके लेने से मना कर दिया। उसने कहा कि उसके पास इतना पैसा नहीं है। इस कारण उसे खाद नहीं दी गई। ग्राम भरतपुरा निवासी 65 वर्षीय किसान राजेंद्र सिंह ने बताया कि बुधवार को उन्हें चार बोरी डीएपी और एक बोरी एनपीके खरीदने का टोकन मिला। जब वे गोदाम पर खाद लेने गए तो केंद्र प्रभारी ने उनसे दो बोरी एनपीके लेने को कहा। मना करने पर केंद्र प्रभारी ने उन्हें खाद देने से इन्कार कर दिया।
किसानों का कहना है कि कई छोटे काश्तकार इतना महंगा एनपीके खाद नहीं खरीद सकते। इसलिए उन्हें बिना खाद लिए लौटना पड़ता है। एक बोरी एनपीके खाद की कीमत 2200 रुपये है, जबकि डीएपी की कीमत 1360 रुपये है। किसानों को डीएपी की जरूरत है, लेकिन उन्हें जबरन दो बोरी डीएपी पर एक बोरी एनपीके दिया जा रहा है। इससे छोटे किसान परेशान हैं।