
भरवारा क्रॉसिंग
लखनऊ। हाईकोर्ट के सख्त रुख के बाद अब भरवारा आरओबी (रेलवे ओवर ब्रिज) के लिए जमीन अधिग्रहण में तेजी आने की उम्मीद जगी है। चार महीने से जमीन के मुआवजे का ही विवाद बना हुआ है। हाल यह है कि अब तक मुआवजे के लिए जमीन का रेट भी तय नहीं हो सका है। इसके लिए अब डीएम को प्रस्ताव भेजा जाएगा।
आरओबी के दायरे में 85 निर्माण आ रहे हैं। इसमें शामिल मकानों-दुकानों आदि के मुआवजे को लेकर आठ अप्रैल को सेतु निगम और राजस्व विभाग की संयुक्त टीम मौके पर पैमाइश के लिए गई थी। हालांकि, विरोध के चलते पैमाइश नहीं कर पाई थी। इसके बाद से मामला विवाद में ही है।
जमीन अधिग्रहण का अभी गजट जारी नहीं हुआ है। पूर्व में हाईकोर्ट ने आरओबी निर्माण रोके जाने से संबंधित याचिका पर सेतु निगम को आदेश दिया गया था कि अधिग्रहित जमीन का मुआवजा देने के बाद काम शुरू किया जाए। हालांकि, अब तक न तो रेट तय हुआ और न ही मुआवजा बंटा। इससे आरओबी का काम रुका है।
भरवारा क्रॉसिंग 186 सी से रोजाना कई ट्रेनें, मालगाड़ियां गुजरती हैं। इससे क्रॉसिंग के दोनों तरफ लंबा जाम लगता है। इसके एक तरफ गोमती नगर की विराज खंड तो दूसरी ओर भरवारा, जगपाल खेड़ा, खरगापुर व दुर्गापुरी कॉलोनी है। फ्लाईओवर बनने से शालीमार टाउनशिप को सीधा रास्ता मिलने के साथ भरवारा एसटीपी व एमिटी विश्वविद्यालय पहुंचना आसान हो जाएगा।
भरवारा रेलवे क्रॉसिंग पर 126 करोड़ की लागत से आरओबी का निर्माण होना है। इसमें जमीन अधिग्रहण के एवज में दी जाने 65 करोड़ की रकम भी शामिल है। करीब 950 मीटर लंबा आरोबी वाई आकार में बनाया जाना है।
