आटा। कच्ची सड़क ने वृद्ध की जान ले ली। परिजन उन्हें चारपाई पर लेटाकर पक्के रास्ते तक ले जा रहे थे, लेकिन रास्ते में ही उनकी मौत हो गई। ग्रामीणों का कहना है कि आजादी के अमृत काल में भी इस गांव की तीन किलोमीटर सड़क आज तक जर्जर है। ग्रामीणों का कहना है कि अगर रास्ता पक्का होता तो शायद वृद्ध की जान बच जाती।

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आटा थाना क्षेत्र के परासन के मजरा कुइया झोर डेरा गांव निवासी अच्छेलाल (68) की मंगलवार रात अचानक तबीयत बिगड़ गई और उन्हें उल्टियां और दस्त शुरू हो गए। सड़क कच्ची और सड़क पर पानी भरने से परिजन रात में इलाज कराने के लिए कहीं नहीं ले जा सके। बुधवार सुबह परिजनों ने एंबुलेंस बुलाई, लेकिन रास्ता कच्चा होने से एंबुलेंस गांव तक नहीं पहुंच सकी और कालपी-चंडौत मार्ग पर पहुंचकर परिजनों को सूचना दी।

तब परिजन व ग्रामीण वृद्ध को इलाज कराने के लिए चारपाई पर लादकर एंबुलेंस तक लेकर जा रहे थे। गांव से करीब एक किलोमीटर तक पहुंचते ही वृद्ध ने दम तोड़ दिया। भतीजे रामऔतार ने बताया कि गांव की सड़क तीन किलोमीटर तक कच्ची है। दो दिनों से हो रही झमाझम बारिश से सड़क में तीन फीट तक पानी भी भरा है। गांव के लोगों का आना जाना बंद है, कामकाज भी ठप है।

ग्रामीणों ने बताया कि सड़क के लिए जनप्रतिनिधियों व अधिकारियों को कई बार शिकायती पत्र दे चुके हैं। इसके साथ ही चुनाव बहिष्कार की भी बात कर चुके हैं, इसके बावजूद भी सुनवाई नहीं हुई। कहा कि अधिकारी चिल्लाते हैं कि आजादी का अमृत काल है, लेकिन उन्हें अभी तक इस नरक से आजादी नहीं मिल सकी है।

मोक्षधाम तक नहीं पहुंचे तो खेत पर ही कर दिया अंतिम संस्कार

आटा। परासन के मजरा कुइया झोर में सड़क न होने से वृद्ध की मौत हो गई। इसके बाद ग्रामीण उनके शव को लेकर घर पहुंचे लेकिन मोक्षधाम के लिए जाने वाली सड़क पर कीचड़ व जलभराव होने से खेत पर ही उनका अंतिम संस्कार कर दिया। ग्रामीण स्वामीदीन, होरीलाल, माखनलाल बालकिशोर ने बताया कि वह करीब पचास साल से देख रहे हैं कि उनकी कोई सुनने वाला नहीं है। अब बच्चे भी बुनियादी समस्याओं से जूझ रहे हैं तो कष्ट होता है। प्रशासन को उनके बारे में सोचना चाहिए। (संवाद)



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