एक राष्ट्र एक चुनाव को लेकर नागरिक परिषद की संगोष्ठी में केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान, उपमुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक, भाजपा प्रदेश अध्यक्ष भूपेंद्र सिंह चौधरी, सेवानिवृत्त न्यायमूर्ति रंगनाथ पांडे्य समेत अन्य वरिष्ठ नेताओं ने गांधी भवन में अपने विचार रखे। कृषि मंत्री और मध्य प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने एक राष्ट्र एक चुनाव को समय की जरूरत बताते हुए कहा कि इसे भाजपा के संकल्प की तरह नहीं बल्कि जनता और देश की जरूरत की तरह लेना चाहिए। उन्होंने कहा देश के विकास और प्रगति को सुनिश्चित करने के लिए एक राष्ट्र एक चुनाव के लिए सभी नागरिकों को एकजुट होना चाहिए।

Trending Videos

केंद्रीय कृषि मंत्री ने कहा कि बार-बार चुनाव कराने से न सिर्फ पैसों का दुरुपयोग होता है बल्कि राजनैतिक कार्यकर्ताओं, आमलोगों, सरकारी कर्मचारियों के समय की भी हानि होती है। मध्य प्रदेश के पिछले विधानसभा चुनावों का उदाहरण देते हुए उन्होंने कहा कि विधानसभा चुनावों में भाजपा की जीत सुनिश्चित करने के बाद थकान उतरी भी नहीं थी तभी लोक सभा चुनाव आ गए। लोक सभा चुनावों के बाद हरियाणा, दिल्ली और फिर अन्य राज्यों के चुनाव क्रम में लगे थे। इससे जनप्रतिनिधियों को जनता के लिए काम करने का मौका भी कम मिलता है। एक साथ लोकसभा और विधानसभा के चुनाव होंगे तो चुने हुए जनप्रतिनिधियों को साढ़े चार साल से अधिक समय जनता के लिए तत्परता से काम करने का मौका मिलेगा।

हाल ही में जम्मू कश्मीर के पहलगाम में हुए आतंकी हमले पर शिवराज ने कहा कि भारत शांति पसंद देश है। हम सभी की भलाई के बारे में सोचते हैं। पूरे विश्व को एक परिवार मानते हैं लेकिन यदि किसी को लगता है कि हमारी सुरक्षा, अखंडता और सहिष्षुता पर हमला करके बच जाएगा तो ऐसा नहीं है। उन्होंने कहा कि हम किसी को छोड़ते नहीं और कोई छेड़े तो छोड़ते नहीं।

एक राष्ट्र एक चुनाव के फायदे गिनाते हुए उपमुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक ने कहा कि भाजपा ने अपने सभी संकल्पों को साकार किया है। एक साथ देश में चुनाव होने से देश की प्रगति को नई गति मिलेगी। कई बार हो रहे चुनावों में लगने वाले धन का विकास के कार्यों में सदुपयोग हो सकेगा और उसी धन से गरीब, किसान, महिलाएं और युवाओं की उज्जवल भविष्य की नींव रखी जाएगी।

सेवानिवृत्त न्यायमूर्ति रंगनाथ पांडे्य ने भी एक राष्ट्र एक चुनाव को लेकर देशवासियों को संगठित होने की बात कही। उन्होंने कहा कि संविधान निर्माता बाबा साहेब डॉ. भीमराव आंबेडकर भी एक राष्ट्र एक चुनाव के पक्षधर थे। आजादी के बाद एक साथ ही चुनाव कराए गए फिर परिस्थितियों को देखते हुए लोकसभा और विधानसभा के चुनावों को अलग-अलग कराया जाने लगा। उन्होंने कहा कि एक राष्ट्र एक चुनाव की नीति भारत को श्रेष्ठ राष्ट्र के रूप में मजबूत करेगी।



Source link

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *