सदर बाजार स्थित पंजाब नेशनल बैंक (पीएनबी) शाखा में चार महीने के भीतर बीमा के नाम पर फर्जीवाड़े का दूसरा बड़ा मामला सामने आया है। मसीहागंज निवासी रिटायर्ड महिला कर्मचारी ने बीमा की आड़ में 14 लाख रुपये की ठगी का आरोप लगाते हुए बैंक मैनेजर विशाल लेखवानी समेत चार के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज कराई है। पुलिस मामले की छानबीन कर रही है।
थाना सीपरी बाजार के मसीहागंज मोहल्ला निवासी कल्पना तिवारी ने पुलिस को बताया कि वर्ष 2023 में वह सरकारी नौकरी से सेवानिवृत्त हुई थीं। उनकी पीएफ की धनराशि पीएनबी में जमा थी। आरोप है कि शाखा मैनेजर रहे विशाल लेखवानी ने पीएनबी मेटलाइफ में निवेश करने का लालच दिया। बैंक मैनेजर ने उनको पूर्वी दिल्ली निवासी विकास पुत्र हरी सिंह से मिलवाया। विकास ने उनको अच्छे रिटर्न का भरोसा दिलाया। बैंक मैनेजर के कहने पर उन्होंने विकास पर भरोसा कर लिया। अलग-अलग धनराशि के चेक के जरिये 14 लाख रुपये जमा करके पॉलिसी करा दी। 9 अक्तूबर 2025 को जब वह भुगतान लेने बैंक पहुंचीं, तब मालूम चला कि उनकी पॉलिसी फर्जी है। छानबीन करने पर मालूम चला कि एजेंट एवं बैंक मैनेजर ने सांठगांठ करके उनकी पूरी रकम अपने परिचित ललिता मौर्य और हरि प्रसाद के खातों में ट्रांसफर कर रकम हड़प ली। उन्होंने इस फर्जीवाड़े की जानकारी शिकायत प्रकोष्ठ में जाकर दी। सीओ सिटी लक्ष्मीकांत गौतम का कहना है कि तहरीर के आधार पर सदर बाजार पुलिस ने प्राथमिकी दर्ज कर ली है। इसकी छानबीन की जा रही है।
पीएनबी में चल रहा खेल, चार माह में सामने आया दूसरा फर्जीवाड़ा
सदर बाजार स्थित पीएनबी में फर्जी बीमा पॉलिसी के नाम पर फर्जीवाड़े का खेल हो रहा है। अक्तूबर में भी इसी तरह फर्जी बीमा पॉलिसी थमाकर रेलवे के रिटायर्ड कर्मचारी को 48 लाख रुपये की चपत लगाई गई थी। इस मामले में भी सेवानिवृत्त रेल कर्मचारी ने बीमा एजेंट विकास के खिलाफ मामला दर्ज कराया था। उस मामले में बैंक अफसरों एवं बीमा कंपनी की सांठगांठ उजागर हुई थी लेकिन काफी समय बीत जाने के बाद भी न बैंक ने दोषी कर्मचारियों के खिलाफ कोई जांच शुरू की, न ही पुलिस ने कार्रवाई की। एक अक्तूबर को रेलवे से सेवानिवृत्त शिवाजी नगर निवासी दयाराम कुशवाहा ने भी पीएनबी मेटलाइफ की विभिन्न योजनाओं में पैसा लगाने के नाम पर 48 लाख रुपये की धोखाधड़ी के आरोप में प्राथमिकी दर्ज कराई थी। विकास पहले भी लोगों को अपना शिकार बना चुका।
तालपुरा निवासी सलीम बेग से 14.60 लाख, हंसारी निवासी मुरली शांता कुमार से 15 लाख रुपये एवं इमामबाड़ा निवासी नाहिद खान एवं उनकी पुत्री से एक लाख रुपये हड़प चुका। पीड़ितों का कहना है कि कई लोगों के साथ फर्जीवाड़ा हुआ लेकिन बैंक ने उनकी कोई सुनवाई नहीं की। चार माह बाद ही एक नया मामला सामने आ गया।
झांसा देकर अपने नाम से बनवाता था चेक
पुलिस को छानबीन में मालूम चला कि विकास काफी शातिर है। शेयर बाजार में ट्रेडिंग के दौरान कई लाख रुपये हारने के बाद उसने बीमा पॉलिसी कराने वालों के साथ फर्जीवाड़ा करना शुरू कर दिया। कई लोगों को वह अपना निशाना बना चुका। बीमा कराने के लिए आने वालों को फर्जी बीमा स्कीम बताकर उनको मुनाफे का लालच देता था। ग्राहक के राजी हो जाने पर जीएसटी आदि की बचत करा देने के नाम पर अपने नाम से चेक बनवा लेता था। इसके बाद चेक अपने निजी खाते में लगाकर पूरा पैसा निकाल लेता था। ग्राहक को फर्जी बीमा के प्रिंटेड कागज थमा देता था। इसकी परिपक्वता अवधि दो से ढाई साल बताता था लेकिन पहले ही भंडा फूट गया।
