प्रदेश में अब आबादी वाले क्षेत्रों से 800 मीटर की दूरी पर ईंट भट्ठे स्थापित हो सकेंगे। इतना ही नहीं वर्ष 2012 की नियमावली से पहले स्थापित हुए, पर उत्तर प्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड से एनओसी (अनापत्ति प्रमाणपत्र) न लेने वाले ईंट भट्ठों को भी वैध माना जाएगा। इसके लिए उत्तर प्रदेश ईंट भट्ठा (स्थापना हेतु स्थल मापदंड) (प्रथम संशोधन) नियमावली, 2026 का अनुमोदन कर दिया गया है।

वन एवं पर्यावरण राज्यमंत्री अरुण कुमार सक्सेना ने शुक्रवार को प्रेस वार्ता में बताया कि 2012 की नियमावली के अनुसार आबादी से एक किलोमीटर के भीतर भट्ठा स्थापित नहीं किया जा सकता था। अब यह दूरी घटाकर 800 मीटर कर दी गई है, जिससे नए भट्ठों की स्थापना का मार्ग प्रशस्त होगा। 

कैबिनेट ने इस नियमावली को 3 फरवरी को हरी झंडी दे दी थी। डॉ संशोधित नियमावली के तहत ऐसे करीब 4000 भट्ठों को वैध माना जाएगा, जो 2012 की नियमावली लागू होने से पहले स्थापित हुए थे, लेकिन बोर्ड से अनापत्ति नहीं ले सके थे। 

यदि संबंधित भट्ठा संचालक ने 2012 से पूर्व सहमति के लिए आवेदन किया हो या खनन विभाग, जिला पंचायत अथवा वाणिज्य कर विभाग से अनुमति या रॉयल्टी चालान प्राप्त किया हो, तो उसे वैध माना जाएगा। सरकार का दावा है कि इस निर्णय से 30 से 40 हजार लोगों को रोजगार मिलेगा और बाजार में सस्ती लाल ईंटों की उपलब्धता बढ़ेगी। इस अवसर पर प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के चेयरमैन आरपी सिंह, प्रमुख सचिव वन वी. हेकाली जिमोमी, सचिव संजीव सिंह और वन मंत्री के ओएसडी सुमति मिश्रा मौजूद रहे।

 



Source link

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

अभी अभी की खबरें