करीब 62 वर्ष पुरानी मुख्य सप्लाई लाइन में जगह-जगह हो रहे रिसाव से प्रतिदिन करीब 25 फीसदी पानी लीकेज में बह जा रहा है। हालात यह हैं कि बबीना कैंट एवं आसपास के गांवों की लगभग 27 हजार की आबादी को पिछले कई महीनों से पर्याप्त पानी नहीं मिल पा रहा है। सेना के कई अहम कार्यालयों तक भी पानी नहीं पहुंच रहा। सैन्य प्रशासन कई बार जल निगम से पर्याप्त पानी की मांग को लेकर पत्र भेज चुका लेकिन समस्या जस की तस बनी है।
बबीना कैंट के अंतर्गत सात आवासीय वार्डों समेत आसपास के गांवों को जल निगम बबीना प्लांट से पानी की आपूर्ति करता है। बबीना कैंट के प्रतिनिधियों का कहना है कि करीब एक साल से रोजाना औसतन महज 7-8 एमएलडी पानी की आपूर्ति हो रही है जबकि समझाैते के मुताबिक 15.50 एमएलडी पानी मिलना चाहिए। ऐसे में जरूरत के मुकाबले 50 फीसदी पानी की भी आपूर्ति नहीं होती। कम पानी मिलने से छावनी इलाके में संकट गहराता जा रहा है। कैंट इलाके में आर्मी अस्पताल, फील्ड अस्पताल, डेंटल सेंटर समेत कई महत्वपूर्ण सैन्य प्रतिष्ठान हैं, यहां निर्बाध जलापूर्ति की आवश्यकता है। पानी की कमी से मिलिट्री इंजीनियरिंग सर्विस (एमईएस) को भी परेशानी हो रही है। सैन्य अफसरों ने कई बार जल निगम को पत्र भेजकर आपूर्ति बढ़ाने की मांग की लेकिन इसे बढ़ाया नहीं जा सका। सेना के सीईडब्ल्यू विंग ने कुछ दिनों पहले जल निगम को पत्र भेजकर आवश्यकता के मुताबिक आपूर्ति कराने की मांग की है। वहीं स्थानीय लोगों का कहना है कि जल संकट की वजह से बाजार से पानी खरीदकर पीना पड़ा रहा है। आगामी गर्मी के सीजन में किल्लत बढ़ जाने की आशंका से वे परेशान हैं।
बूढ़ा हो चुका बबीना वाटर फिल्टर प्लांट
अधिकारियों के मुताबिक बबीना वाटर फिल्टर प्लांट सन् 1964 में बनाया गया था। इसकी क्षमता 45 एमएलडी है मगर इससे जुड़ी पाइप लाइन करीब 62 साल पुरानी हो चुकी है। मानक के मुताबिक किसी पाइपलाइन की आयु 30 साल होती है। जगह-जगह पाइप फटने की वजह से करीब 15 एमएलडी पानी रोज बर्बाद हो जाता है।
यहां जलापूर्ति व्यवस्था सुधारने के लिए नया प्रोजेक्ट बनाया गया है। इसके लिए जल्द ही काम शुरू कराया जाएगा। नए प्लांट के बनने के बाद यह समस्या दूर हो जाएगी। जितना करार हुआ है, उसके मुताबिक कैंट इलाके को पानी मिलेगा।– मुकेश पाल, अधिशासी अभियंता, जल निगम
जगह-जगह लीकेज में बर्बाद हो रहा लाखों लीटर पानी
पीने के पानी की कमी से कई मोहल्लों में लोगों को पीने का पानी नसीब नहीं हो रहा। वहीं, महानगर में ही दर्जनों इलाके ऐसे हैं, जहां लीकेज की वजह से लाखों लीटर पानी रोजाना बर्बाद हो रहा है। काफी समय बीत जाने के बाद भी इनकी मरम्मत नहीं हुई। महानगर में अल्पाइन स्कूल के पास, फिल्टर रोड में जल संस्थान कार्यालय के आगे, वार्ड नंबर 34 नई बस्ती में चांद गेट के पास, मिशन कंपाउंड के मेन रोड पर और खुशीपुरा में छोटी काली माता मंदिर के पास पिछले काफी समय से लीकेज है। इस वजह से रोजाना पानी बर्बाद हो रहा है। इसी तरह पुरानी तहसील के पास पानी की टंकी के ओवरफ्लो पानी को भी नाली में बहाया जा रहा है। स्थानीय लोगों ने इसकी शिकायत भी की लेकिन इसे नहीं हटाया गया।
