इस्राइल के ओर अकीवा शहर में रह रहे झांसी के पंकज वर्मा ने बताया कि 28 फरवरी की रात सबसे ज्यादा संघर्ष वाली रही। 15 घंटे में 20 बार सायरन बजा। वह जिन स्थान पर रह रहे हैं, उससे कुछ किलोमीटर दूरी पर ईरान की ओर से दागी दो मिसाइलों को इस्राइल ने हवा में ही ध्वस्त कर दिया तो धमक इतनी तेज थी कि बंकर के अंदर की जमीन में कंपन होने लगी। इससे सभी लोग घबरा गए।

झांसी के खुशीपुरा निवासी पंकज ने बताया कि इस्राइल और ईरान में हो रही जंग के बीच जैसे ही सायरन बजता है, वैसे ही सभी लोग बंकर में चले जाते हैं। हर मोहल्ले में दो से तीन बंकर बने हुए हैं, इनकी क्षमता 50 से लेकर डेढ़ सौ लोगों तक है। इस्राइल के जो बड़े शहर हैं, वहां के बंकरों की क्षमता और भी अधिक है। उन्होंने बताया कि वह पिछले डेढ़ साल से इस्राइल में रहकर प्लास्टिक फैक्टरी में काम कर रहे हैं। दो बार पहले भी इस्राइल और ईरान के बीच संघर्ष हुआ है लेकिन जैसी स्थिति इस बार की है, वैसी पहले नहीं रही।

पंकज ने बताया कि शनिवार को एक दिन में पहली बार इतने अधिक सायरन बजे। सुबह 7:30 बजे पहली बार सायरन बजा था, तब सभी लोग बंकर में चले गए थे। फिर रात साढ़े दस बजे तक 20 बार सायरन बजा। ऐसे में 15 घंटों में करीब तीन घंटे तो बंकर में ही गुजारने पड़े। हालांकि, रविवार को वैसी स्थिति नहीं रही। दिनभर में दो बार ही सायरन बजे। पिता सुरेश चंद्र वर्मा, मां जानकी देवी, भाई गौरव वर्मा समेत अन्य परिजनों और दोस्तों ने भी फोन करके हाल जाना। पंकज ने बताया कि जंग शुरू होने के बाद अब परिवार वाले भी ज्यादा फोन करने लगे हैं। चूंकि काम की शिफ्ट भी बदलती रहती है ऐसे में वह खुद भी परिवार वालों को फोन करके जानकारी देते रहते हैं।

कम समय के लिए खुलते स्टोर, वस्तुओं की कीमतें नहीं बढ़ीं

पंकज ने बताया कि पहले ओर अकीवा शहर में सुबह आठ बजे से शाम सात बजे तक खानपान के स्टोर खुलते थे मगर अब कम समय के लिए खुलते हैं। यह इस बात पर भी निर्भर करता है कि दिन में सायरन कितनी बार बज रहा है। हालांकि, खाद्य पदार्थ समेत अन्य वस्तुओं की कीमतें नहीं बढ़ी हैं।



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