इस्राइल और अमेरिका के संयुक्त हमले में ईरान के सुप्रीम लीडर अयातुल्ला अली खामेनेई की मौत की पूरी दुनिया में चर्चा हो रही है। इस बीच बाराबंकी का किंतूर गांव शोक में डूबा नजर आया।
गांव वालों का गमजदा होना लाजिमी भी है, क्योंकि क्योंकि 196 साल पहले किंतूर गांव से ईरान गए सैयद अहमद मूसवी के पोते रूहुल्लाह खुमैनी ने ही ईरान की सत्ता व सियासत की दिशा बदल दी थी। हमले में मारे गए ईरान के शासक अयातुल्ला अली खामेनेई उन्हीं खुमैनी के शागिर्द थे।
किंतूर गांव पहुंची संवाद न्यूज एजेंसी की टीम ने देखा कि लोग अमेरिका को कोस रहे थे। गांव के बाहर एक दुकान पर पांच छह लोग चर्चा कर रहे थे कि अमेरिका व इस्राइल ने ईरान पर 1200 से ज्यादा बम गिराए हैं।
इन हमलों में सुप्रीम लीडर अयातुल्ला अली खामेनेई के साथ उनकी बेटी-दामाद, बहू और पोती की मौत हो गई है। लोग कहने से नहीं चूके कि रूहुल्लाह खुमैनी होते तो वह जरूर कुछ ऐसा करते जिससे अमेरिका के दांत खट्टे हो जाते।
