होली के पावन पर्व पर श्रीराम जन्मभूमि परिसर में विराजमान रामलला ने भक्तों को विशेष श्रृंगार में दर्शन दिए। पगड़ी धारण किए और हाथ में पिचकारी लिए रामलला के अलौकिक स्वरूप ने श्रद्धालुओं का मन मोह लिया। जैसे ही पट खुले, मंदिर परिसर में “जय श्रीराम” के जयघोष के साथ अबीर-गुलाल की खुशबू फैल गई।

मठ-मंदिरों से लेकर सरयू तट तक होली का उल्लास छाया रहा। साधु-संतों ने भक्ति रस में डूबी फाग और चौताल गाकर वातावरण को आध्यात्मिक रंगों से सराबोर कर दिया। मंदिरों में भगवान को अबीर-गुलाल अर्पित कर विशेष भोग लगाया गया और भक्तों ने भी एक-दूसरे को गुलाल लगाकर पर्व की शुभकामनाएं दीं।

शहर ही नहीं, आसपास के गांवों में भी फाग गीतों की गूंज सुनाई दी। चौपालों पर ढोलक और मंजीरे की थाप पर पारंपरिक फगुआ गाए गए। महिलाओं ने सामूहिक रूप से होली गीत प्रस्तुत कर परंपरा को जीवंत रखा।

होली पर अयोध्या में सौहार्द का भी रंग चटख नजर आ रहा है। सबसे खास तस्वीर तब देखने को मिली जब हिंदू और मुस्लिम समाज के लोग एक साथ रंग खेलते नजर आए। पूर्व पक्षकार बाबरी मस्जिद, इकबाल अंसारी ने संतों को गले लगाकर होली की शुभकामनाएं दीं। इक़बाल ने कहा कि अयोध्या की परंपरा भाईचारे की रही है। हम सब मिलकर त्योहार मनाते हैं, यही हमारी पहचान है।



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