उरई। मंडलायुक्त विमल कुमार दुबे ने शनिवार को कलक्ट्रेट परिसर स्थित विभिन्न पटलों का निरीक्षण कर कार्यालयों की कार्यप्रणाली की समीक्षा की। उन्होंने निर्देश दिए कि जो विभाग ई-ऑफिस प्रणाली से कार्य नहीं कर रहे हैं ऐसे विभागाध्यक्षों का वेतन रोका जाए। निरीक्षण के दौरान मंडलायुक्त ने अभिलेखों के रखरखाव, लंबित प्रकरणों की स्थिति और उनके निस्तारण की प्रगति का परीक्षण किया।
उन्होंने निर्देश दिए कि सभी लंबित मामलों को अद्यतन रखते हुए समयबद्ध और गुणवत्तापूर्ण निस्तारण सुनिश्चित किया जाए ताकि आमजन को अनावश्यक विलंब का सामना न करना पड़े। शस्त्र अनुभाग के निरीक्षण में उन्होंने शस्त्र लिपिक को निर्देश दिया कि ऐसे सभी लाइसेंस धारकों की सूची तैयार की जाए जिन्होंने निर्धारित समयावधि में शस्त्र लाइसेंस का नवीनीकरण नहीं कराया है। ऐसे लाइसेंस धारकों को नोटिस जारी करने के निर्देश भी दिए। साथ ही शस्त्रागार भवन की मरम्मत कराने के लिए कहा। निरीक्षण के दौरान कर्मियों की पासबुक में फोटो चस्पा न पाए जाने पर मंडलायुक्त ने तत्काल फोटो लगाने के निर्देश दिए।
भूलेख अनुभाग के निरीक्षण में लेखपाल और चैनमैन से संबंधित तीन मामले लंबित मिले। इस पर मंडलायुक्त ने उन्हें एक सप्ताह के भीतर मामलों को निस्तारित करने के निर्देश दिए। अभिलेखागार के निरीक्षण के दौरान परगना वाइज बोर्ड को देखकर उन्होंने प्रसन्नता व्यक्त की और इसे मंडल के अन्य जनपदों में भी लागू करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि बंदोबस्त नक्शे की पक्की नकल समयावधि में उपलब्ध कराई जाए और अभिलेखागार से विभिन्न न्यायालयों की ओर से मांगी गई पत्रावलियां समय से भेजी जाएं। निरीक्षण के दौरान उन्होंने पाया कि कई मामलों में ऑनलाइन शिकायतों को स्पेशल क्लोज कर दिया जाता है। इस पर उन्होंने सख्त निर्देश दिए कि शिकायतों का निस्तारण शिकायतकर्ता के प्रकरण के गुण-दोष के आधार पर किया जाए। इस दौरान जिलाधिकारी राजेश कुमार पांडेय समेत अन्य अधिकारी मौजूद रहे।