पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष को देखते हुए शिपिंग कंपनियों ने निर्यातकों पर इमरजेंसी कॉन्फ्लिक्ट सरचार्ज (आपात संघर्ष अधिभार) यानी वार टैक्स थोप दिया है। ये टैक्स एक कंटेनर पर 3000 डालर (लगभग 2.82 लाख) रुपये है। प्रति कंटेनर मुनाफा ही 2500 से 3000 डालर के आसपास होने के चलते यूपी के निर्यातकों के लिए ये बड़ा झटका है।

यह अतिरिक्त शुल्क बहरीन, जिबूती, मिस्र, इरिट्रिया, इराक, जॉर्डन, सऊदी अरब, कुवैत, ओमान, कतर, सूडान, संयुक्त अरब अमीरात और यमन आदि को जाने वाले कंटेनरों पर लागू किया गया है। वैश्विक शिपिंग कंपनी सीएमए सीजीएम सहित अन्य कंपनियों ने इमरजेंसी कॉन्फ्लिक्ट सरचार्ज लागू करने की घोषणा की है। कंपनियों के अनुसार पश्चिम एशिया में जारी तनाव और समुद्री मार्गों, खासकर स्ट्रेट आफ होर्मुज और बाब-अल-मनदेव स्ट्रेट के आसपास सुरक्षा जोखिम बढ़ने के कारण यह शुल्क लगाया गया है।

ये भी पढ़ें – यूपी: सिर्फ बयानबाजी नहीं है अखिलेश द्वारा मायावती को पीएम बनाने की बात, नीतीश को लेकर है यह रणनीति



ये भी पढ़ें – प्रदेश में सक्रिय हुआ अलनीनो, इस बार मार्च में 40 के पार जा सकता है पारा; चार डिग्री तक बढ़ सकता है तापमान

कंपनियों का कहना है कि ईरान से जुड़े हालात के कारण जहाजों, चालक दल और कार्गो की सुरक्षा के लिए अतिरिक्त इंतजाम करने पड़ रहे हैं, जिससे परिचालन लागत बढ़ गई है।

– भारतीय मुद्रा में देखें तो 40 फुट के एक कंटेनर पर करीब 2.82 लाख रुपये तक अतिरिक्त भुगतान करना पड़ रहा है। लॉजिस्टिक्स विशेषज्ञों के अनुसार बड़े मालवाहक जहाजों में औसतन 3500 कंटेनर तक लदे होते हैं।

– यदि प्रति कंटेनर औसतन 3000 डॉलर का सरचार्ज लिया जाए तो एक बड़े जहाज से ही करीब 90 करोड़ रुपये तक का अतिरिक्त शुल्क वसूला जा रहा है।

– छोटे जहाजों में लगभग 300 कंटेनर होते हैं और निर्यातकों को 8 करोड़ अलग से देना पड़ रहा है। इस तरह केवल वार टैक्स के नाम पर शिपिंग कंपनियों की अतिरिक्त कमाई करोड़ों रुपये में पहुंच गई है।

 



















इतना लग रहा है टैक्स
20 फुट ड्राई कंटेनर 2000 डॉलर
40 फुट ड्राई कंटेनर 3000 डॉलर
विशेष उपकरण कंटेनर 4000 डॉलर



Source link

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *