यूपी के राजनीतिक गलियारे और प्रशासनिक गलियों में आज तीन किस्से काफी चर्चा में रहे। चाहे-अनचाहे आखिर ये बाहर आ ही जाते हैं। इन्हें रोकने की हर कोशिश नाकाम होती है। आज की कड़ी में ‘पुरानी जगह से नई जिम्मेदारी’ की कहानी। इसके अलावा ‘बेचैनी लिस्ट की’ और ‘साहब के पुराने चर्चे नए हुए’ के किस्से भी चर्चा में रहे। आगे पढ़ें, नई कानाफूसी…

पुरानी जगह से नई जिम्मेदारी

एक नौकरशाह की जिम्मेदारी में बदलाव हुआ है लेकिन वह अपनी पुरानी जगह से ही इसका निर्वहन कर रहे हैं। दरअसल नौकरशाह को यकीन है कि उनकी जिम्मेदारी फिर बदली जाएगी। इसलिए वह पुरानी जगह से नहीं हिलने को ही ठीक मान रहे हैं। उनकी कई शिकायतें ऊपर तक पहुंची हैं। पता चला है कि इस सबके चलते यह नौकरशाह बेहद जरूरी फाइलें ही देख रहे हैं।

बेचैनी लिस्ट की

ब्यूरोक्रेसी में इन दिनों लिस्ट की बेचैनी उबाल मार रही है। नए के साथ दिग्गजों के नाम की चर्चा धुरंधर के किरदारों से कम वायरल नहीं है। उड़ती-उड़ती खबर है कि कुछ कद्दावर अफसरों को कद के हिसाब से नई पोस्टिंग मिल सकती है। वहीं, बरसों से हाशिये पर बैठे अफसर महा-कमजोर जिले की कमान संभालने के लिए भी संभावनाएं तलाश रहे हैं। ऐसे ही चार साहब जिलों में पसीना बहाने के लिए पहले तल से लेकर पंचम तल तक की परिक्रमा कर रहे हैं।

साहब के पुराने चर्चे नए हुए

प्रदेश में कुछ दिन पहले ही पुलिस विभाग में बड़े पैमाने पर बदलाव किए गए। एक अधिकारी को पूर्वांचल के एक जिले की कप्तानी दी गई। साहब ने कुर्सी संभाली और 72 घंटे के भीतर कोतवाल और दरोगा को शंट कर दिया। फिर क्या था, वहां के फित्ती वालों से लेकर गोल्डन स्टार वाले पुलिसकर्मी उनका इतिहास खंगालने में जुट गए। अवध के जिले में तैनाती के दौरान हेड कांस्टेबल वाला पंगा और उसके पीछे फाइव स्टार होटल में पार्टी न होने की वजह अचानक चर्चा में आ गई। अब सभी साहब की पुरानी चर्चाओं में व्यस्त हैं।



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